गंगानहर से इंदिरा गांधी नहर तक: कैसे बना राजस्थान का विशाल नहर तंत्र, वीडियो में जाने रेगिस्तान में ऐसे पहुंचा पानी
राजस्थान के पश्चिमी हिस्से को पानी उपलब्ध कराने वाली इंदिरा गांधी नहर परियोजना को राज्य की सबसे महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं में गिना जाता है। इसे पश्चिमी राजस्थान की जीवनरेखा भी कहा जाता है। इस परियोजना ने थार के बड़े हिस्से में सिंचाई, पेयजल और कृषि विकास की संभावनाएं बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
1948 में रखी गई थी नहर की नींव
इंदिरा गांधी नहर को मूल रूप से राजस्थान नहर परियोजना के नाम से जाना जाता था। इसकी कल्पना वर्ष 1948 में बीकानेर राज्य के इंजीनियर कंवर सेन ने की थी। उद्देश्य था कि पंजाब की नदियों के पानी को राजस्थान के शुष्क और रेगिस्तानी क्षेत्रों तक पहुंचाया जाए। केंद्र सरकार के दस्तावेजों के अनुसार परियोजना की पहली व्यवहार्यता रिपोर्ट 1951 में तैयार की गई थी।इसके बाद परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए विस्तृत सर्वेक्षण और योजनाएं तैयार की गईं। जनवरी 1955 में रावी और व्यास नदियों के अतिरिक्त जल के बंटवारे को लेकर समझौता हुआ। बाद में 1981 में राजस्थान के हिस्से के पानी में वृद्धि की गई।
31 मार्च 1958 को शुरू हुआ निर्माण
इंदिरा गांधी नहर परियोजना का औपचारिक निर्माण कार्य 31 मार्च 1958 को शुरू हुआ। तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री गोविंद वल्लभ पंत ने परियोजना का उद्घाटन किया था।नहर को पानी पंजाब के हरिके बैराज से मिलता है। हरिके बैराज सतलुज और व्यास नदी के संगम क्षेत्र में स्थित है। वहां से फीडर नहर के जरिए पानी राजस्थान पहुंचता है और आगे मुख्य नहर तथा शाखाओं के माध्यम से रेगिस्तानी क्षेत्रों में वितरित किया जाता है।
1984 में बदला गया नाम
शुरुआत में इसका नाम राजस्थान नहर था। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निधन के बाद वर्ष 1984 में इसका नाम बदलकर इंदिरा गांधी नहर परियोजना कर दिया गया।इसके बाद परियोजना का विस्तार चरणबद्ध तरीके से किया गया। मुख्य नहर का निर्माण 1986 तक पूरा हो गया और नहर का पानी जैसलमेर के मोहनगढ़ तक पहुंचा।
रेगिस्तान में बदली खेती की तस्वीर
इंदिरा गांधी नहर का सबसे बड़ा प्रभाव पश्चिमी राजस्थान की कृषि पर पड़ा। जिन क्षेत्रों में खेती काफी हद तक बारिश पर निर्भर थी, वहां सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होने लगी। श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर और जैसलमेर समेत कई क्षेत्रों में कृषि गतिविधियों का विस्तार हुआ।परियोजना का उद्देश्य केवल खेतों तक पानी पहुंचाना नहीं था। इसके तहत पेयजल, औद्योगिक पानी, सूखा प्रभावित क्षेत्रों को राहत, रोजगार और पर्यावरण सुधार जैसे लक्ष्य भी निर्धारित किए गए थे।
लाखों हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार परियोजना के कमांड क्षेत्र में करीब 19.63 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया था। बाद में राज्य सरकार के निर्णय के अनुसार लगभग 16.17 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए नहर निर्माण कार्य पूरा किया गया।
आज भी है बेहद महत्वपूर्ण
इंदिरा गांधी नहर केवल सिंचाई का साधन नहीं है। राजस्थान के कई शहरों और गांवों में इसका पानी पेयजल के लिए भी इस्तेमाल होता है। उदाहरण के तौर पर राजस्थान के नागौर जिले के कई गांवों और कस्बों को इंदिरा गांधी नहर से पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है।हालांकि समय के साथ नहरों में रिसाव और लाइनिंग के खराब होने जैसी समस्याएं भी सामने आई हैं। पानी की बर्बादी रोकने और सिंचाई दक्षता बढ़ाने के लिए नहर प्रणाली के पुनर्वास और आधुनिकीकरण की परियोजनाएं भी चलाई गई हैं।