दही-हांडी से लेकर महाआरती तक! इस जन्माष्टमी परिवार के साथ प्लान करें इन 5 धार्मिक शहरों की भक्तिमयी यात्रा
जन्माष्टमी इस साल 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। अगर हर साल घर पर पूजा करने के बजाय इस बार परिवार के साथ कुछ अलग अनुभव लेना चाहते हैं, तो देश की कई धार्मिक और पर्यटन स्थलों का रुख कर सकते हैं। जन्माष्टमी के दौरान इन जगहों के मंदिरों में विशेष सजावट होती है और भजन-कीर्तन के साथ धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। पूरा माहौल कृष्णमय नजर आता है।
इस साल परिवार के साथ मथुरा, वृंदावन, गोकुल, पुरी, मुंबई, द्वारका या केरल के गुरुवायुर मंदिर की यात्रा की जा सकती है। ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय के अनुसार, अष्टमी तिथि 4 सितंबर को सुबह 2:25 बजे शुरू होगी और 5 सितंबर को रात 12:13 बजे तक रहेगी। दिल्ली में निशिता पूजा का समय रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक रहेगा।
परिवार के साथ मथुरा और वृंदावन मनाएं जन्माष्टमी
अगर जन्माष्टमी को सबसे खास अंदाज में महसूस करना है तो मथुरा और वृंदावन की यात्रा बेहतरीन विकल्प हो सकती है। मथुरा के जन्मभूमि मंदिर से लेकर वृंदावन के प्रमुख मंदिरों तक जन्माष्टमी पर भजन-कीर्तन और विशेष पूजा का आयोजन होता है। इसके अलावा गोकुल, बरसाना और गोवर्धन भी घूमने जा सकते हैं। ब्रज क्षेत्र में इस दौरान चारों ओर कृष्ण भक्ति का माहौल नजर आता है।
पुरी में मनाएं खास जन्माष्टमी
पुरी में जन्माष्टमी के दौरान धार्मिक कार्यक्रमों के साथ सांस्कृतिक आयोजन भी होते हैं। परिवार के साथ मंदिर दर्शन करने के अलावा यहां समुद्र तट और शहर के दूसरे पर्यटन स्थलों की सैर भी की जा सकती है। धार्मिक आस्था के साथ घूमने-फिरने का अनुभव लेना चाहते हैं तो पुरी अच्छा विकल्प हो सकता है।
मुंबई में दही-हांडी का लें आनंद
मुंबई में जन्माष्टमी का मतलब दही-हांडी की धूम से भी है। दादर, वर्ली और ठाणे जैसे इलाकों में दही-हांडी के भव्य आयोजन देखने को मिलते हैं। ऊंचाई पर बंधी मटकी को फोड़ने के लिए गोविंदा पथक की मानव पिरामिड बनाते हुए प्रस्तुति लोगों का ध्यान खींचती है। परिवार के साथ मुंबई के दूसरे पर्यटन स्थलों की सैर भी की जा सकती है।
द्वारका में भक्तिमय हो जाता है माहौल
भगवान कृष्ण की नगरी द्वारका में जन्माष्टमी के दौरान पूरा माहौल भक्तिमय हो जाता है। द्वारकाधीश मंदिर में विशेष पूजा और धार्मिक आयोजन होते हैं। मंदिर दर्शन के साथ परिवार समुद्र तट और आसपास के दूसरे धार्मिक स्थलों की सैर भी कर सकता है। कृष्ण भक्ति और यात्रा का अनुभव एक साथ लेना चाहते हैं तो द्वारका जा सकते हैं।
जन्माष्टमी पर कृष्ण के बाल रूप की होती है पूजा
केरल का गुरुवायुर मंदिर भगवान कृष्ण के बाल रूप को समर्पित प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। जन्माष्टमी के अवसर पर यहां विशेष पूजा और धार्मिक आयोजन होते हैं। मंदिर में कृष्ण के बाल रूप की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। ऐसे में दक्षिण भारत में जन्माष्टमी मनाने की इच्छा रखने वाले कृष्ण भक्तों के लिए गुरुवायुर एक खास अनुभव दे सकता है।