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इंदिरा गांधी नहर का नाम बदलने की मांग, वीडियो में जानिए क्यों चर्चा में आई यह नहर और क्या है इसका इतिहास

 

राजस्थान की पहचान और पश्चिमी हिस्से की जीवनरेखा मानी जाने वाली इंदिरा गांधी नहर परियोजना एक बार फिर चर्चा में है। नहर का नाम बदलने की मांग को लेकर समय-समय पर आवाजें उठती रही हैं। इस मांग के पीछे नहर और राजस्थान के पुराने इतिहास को जोड़कर देखने की दलील दी जाती है। खास तौर पर बीकानेर रियासत के महाराजा गंगा सिंह के सिंचाई से जुड़े प्रयासों का उल्लेख किया जाता है।

इंदिरा गांधी नहर परियोजना आज पश्चिमी राजस्थान के बड़े हिस्से में सिंचाई और पेयजल व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। राजस्थान सरकार के दस्तावेज के अनुसार इसे पश्चिमी राजस्थान की जीवनरेखा के रूप में जाना जाता है। परियोजना का उद्देश्य मरुस्थलीय क्षेत्र में पानी पहुंचाकर सिंचाई के साथ सूखा प्रभावित इलाकों के विकास में मदद करना था।

महाराजा गंगा सिंह के प्रयासों से जुड़ा है सिंचाई का इतिहास

राजस्थान के उत्तरी हिस्से में सिंचाई व्यवस्था के विकास का इतिहास बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह से भी जुड़ा हुआ है। राजस्थान सरकार के एक दस्तावेज के अनुसार, बीकानेर रियासत को सतलज नदी के पानी में हिस्सा सितंबर 1920 में मिला था। इसके बाद क्षेत्र में सिंचाई के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास हुए।

मरुस्थल में पानी पहुंचने से कृषि और आबादी के विकास को गति मिली। यही वजह है कि पश्चिमी राजस्थान की सिंचाई परियोजनाओं के इतिहास में बीकानेर रियासत और महाराजा गंगा सिंह के प्रयासों का उल्लेख मिलता है।

1958 में शुरू हुआ था नहर परियोजना का निर्माण

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आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, इंदिरा गांधी नहर परियोजना का निर्माण 31 मार्च 1958 को शुरू हुआ था। शुरुआत में इसे राजस्थान नहर परियोजना के नाम से जाना जाता था। बाद में 2 नवंबर 1984 को इसका नाम इंदिरा गांधी के नाम पर किया गया।

यह परियोजना हरिके बैराज से शुरू होती है और राजस्थान के पश्चिमी हिस्सों तक पानी पहुंचाती है। परियोजना के पहले चरण में फीडर और मुख्य नहर समेत बड़ी नहर प्रणाली विकसित की गई। सरकारी दस्तावेज में पहले चरण के लिए फीडर की लंबाई 204 किलोमीटर और मुख्य नहर की लंबाई 189 किलोमीटर बताई गई है।

रेगिस्तान में बदली खेती की तस्वीर

इंदिरा गांधी नहर के जरिए पानी पहुंचने के बाद पश्चिमी राजस्थान के कई इलाकों में कृषि गतिविधियों का विस्तार हुआ। पहले जहां पानी की कमी के कारण खेती बेहद सीमित थी, वहीं नहर परियोजना के बाद सिंचाई की सुविधाएं बढ़ीं।

सरकारी आर्थिक समीक्षा में भी इस परियोजना को पश्चिमी राजस्थान की प्यासी मरुभूमि को पानी उपलब्ध कराने वाली महत्वाकांक्षी परियोजना बताया गया है। परियोजना का उद्देश्य सिंचाई के अलावा सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पर्यावरण सुधार, रोजगार और पुनर्वास जैसे लक्ष्यों से भी जुड़ा रहा है।

नाम बदलने की मांग पर क्या है स्थिति?

इंदिरा गांधी नहर का नाम बदलने की मांग सामने आने के बाद इसके इतिहास को लेकर चर्चा तेज हुई है। मांग करने वाले लोग नहर के इतिहास में बीकानेर रियासत और महाराजा गंगा सिंह के योगदान का उल्लेख करते हुए नामकरण पर पुनर्विचार की बात करते हैं।हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेजों में वर्तमान नाम और परियोजना के इतिहास का स्पष्ट उल्लेख है। नाम बदलने की मांग और उसके संबंध में कोई आधिकारिक निर्णय अलग विषय है। इसलिए इसे फिलहाल एक मांग के रूप में ही देखा जाना चाहिए।इंदिरा गांधी नहर आज भी राजस्थान के बड़े हिस्से के लिए सिंचाई और पेयजल की महत्वपूर्ण व्यवस्था है। इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में पुराने बीकानेर राज्य के सिंचाई प्रयासों से लेकर स्वतंत्र भारत की बड़ी नहर परियोजना तक कई महत्वपूर्ण पड़ाव जुड़े हुए हैं।