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राजस्थान का जवाई बांध के प्राकृतिक सौंदर्य के बीच छिपे हैं घातक शिकारी, वीडियो में जानिए क्यों यह इलाका है जोखिम से भरा

 

राजस्थान के पाली ज़िले में स्थित जवाई बांध अपने आप में प्रकृति का एक अनमोल खजाना है। यहां की खूबसूरत झील, चारों ओर फैले अरावली के पहाड़ और शांत वातावरण इस क्षेत्र को एक अद्भुत पर्यटन स्थल बनाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह शांत और सुंदर दिखने वाला इलाका कुछ बेहद घातक और रहस्यमयी जीवों का भी घर है? जी हां, जवाई सिर्फ सुंदरता ही नहीं, बल्कि खतरनाक जीवन का भी केंद्र है।

<a href=https://youtube.com/embed/DB1U_swAERc?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/DB1U_swAERc/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden"" title="Jawai Dam, कब, कैसे, किसने, जवाई बांध के निर्माण की ऐतिहासिक कहानी, क्षेत्रफल, लम्बाई, चौड़ाई, गेट" width="695">
जवाई बांध: प्राकृतिक सौंदर्य का गढ़
1932 में लखराज सिंचाई परियोजना के तहत बना जवाई बांध, पाली जिले के सुमेरपुर और शेगरा के बीच फैला हुआ है। इस बांध का पानी कृषि और पेयजल के लिए उपयोग में आता है, लेकिन इसके इर्द-गिर्द बना जंगल और पहाड़ी क्षेत्र इसे एक जैव विविधता का केंद्र बनाते हैं। यहां पक्षियों की कई प्रजातियां, मगरमच्छ, तेंदुए और भालू तक देखे जा सकते हैं।बांध का शांत जल, उसमें तैरती प्रवासी पक्षियों की झलक और आसपास के ग्रामीण क्षेत्र मिलकर जवाई को एक ऐसा स्वरूप देते हैं, जो मन को मोह लेता है। लेकिन इस मोहकता के पीछे छिपा है एक अदृश्य खतरा — यहाँ के खतरनाक जीव।

घातक जीवों का बसेरा: सुंदरता में छिपा डर
जवाई बांध के आसपास के क्षेत्र में ऐसे कई जीव पाए जाते हैं, जो इंसानों के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। इनमें प्रमुख हैं:

1. तेंदुए (Leopards):
जवाई की सबसे बड़ी पहचान है – यहाँ के तेंदुए। आमतौर पर तेंदुए घने जंगलों में पाए जाते हैं, लेकिन जवाई की खास बात यह है कि यहां के तेंदुए पहाड़ी गुफाओं में रहते हैं। यह भारत का शायद अकेला ऐसा क्षेत्र है जहां तेंदुए इंसानी बस्तियों के पास खुलेआम विचरण करते हैं, और फिर भी दोनों के बीच एक खास तरह का ‘अघोषित सामंजस्य’ बना हुआ है।हालांकि कई बार रात के समय तेंदुओं के गांव में घुस आने की घटनाएं सामने आती हैं, जिससे ग्रामीणों में भय व्याप्त रहता है। बच्चों और मवेशियों पर इनके हमले भी समय-समय पर दर्ज होते रहे हैं।

2. मगरमच्छ:
जवाई बांध की झील सैकड़ों मगरमच्छों का घर है। ये मगरमच्छ आमतौर पर झील के किनारों पर धूप सेंकते या पानी में तैरते नजर आते हैं। हालाँकि वे इंसानों पर तभी हमला करते हैं जब उन्हें खतरा महसूस होता है या कोई बहुत पास चला जाए। फिर भी, मछली पकड़ने वाले ग्रामीणों या नहाने गए बच्चों के लिए यह खतरा जानलेवा हो सकता है।

3. भालू और जंगली सुअर:
बांध के पास के जंगलों में स्लॉथ बियर (भालू) भी देखे जाते हैं। ये जानवर विशेष रूप से रात्रि के समय बाहर निकलते हैं और अगर छेड़ दिया जाए तो हमला कर सकते हैं। इसके अलावा जंगली सुअर, जो आमतौर पर झुंड में चलते हैं, खेती को भी नुकसान पहुंचाते हैं और इंसानों के लिए खतरा बन सकते हैं।

पर्यटन बनाम जीवन का खतरा
आजकल जवाई एक ‘लेपर्ड सफारी डेस्टिनेशन’ के रूप में प्रसिद्ध होता जा रहा है। देश-विदेश से पर्यटक यहां तेंदुए देखने आते हैं। खुले जीप सफारी का आनंद लेते हुए कई बार लोग तेंदुओं के बहुत नजदीक पहुंच जाते हैं, जो एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है। पर्यटकों की बढ़ती संख्या के कारण जानवरों का नैसर्गिक व्यवहार भी प्रभावित हो रहा है।जहां एक ओर यह क्षेत्र पर्यटन को बढ़ावा दे रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय जीवन खतरे में है। कई बार रात को तेंदुओं के हमले में मवेशी मारे जाते हैं, और लोगों को सतर्क रहना पड़ता है। सरकार और वन विभाग द्वारा जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन अभी भी बहुत कुछ करने की आवश्यकता है।

संरक्षण की ज़रूरत
जवाई की जैव विविधता को संरक्षण की अत्यधिक आवश्यकता है। यह इलाका सिर्फ पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि एक संपूर्ण इको-सिस्टम है जहां इंसान और जानवर एक साथ जीने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार को चाहिए कि पर्यटन गतिविधियों को सीमित कर प्राकृतिक आवासों की रक्षा करे और ग्रामीणों के लिए सुरक्षित जीवन सुनिश्चित करे।

वन विभाग को चाहिए कि वह:
कैमरा ट्रैप्स और GPS से निगरानी बढ़ाए
ग्रामीणों को सुरक्षात्मक उपायों की ट्रेनिंग दे
तेंदुओं के लिए सुरक्षित जोन बनाए
मगरमच्छों के आस-पास चेतावनी बोर्ड और बाड़बंदी करे

जवाई बांध सिर्फ एक झील नहीं, बल्कि एक जीवंत जंगल का धड़कता दिल है। इसकी सुंदरता जितनी मोहक है, वहां का जीवन उतना ही संवेदनशील और जोखिमपूर्ण है। यह जरूरी है कि हम इस क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा की सराहना करें, लेकिन साथ ही उसके खतरों को भी समझें और उसके संरक्षण में भागीदार बनें। तभी यह ‘प्राकृतिक खजाना’ भविष्य में भी सुरक्षित रह सकेगा — इंसानों और जानवरों – दोनों के लिए।