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शाही ठाठ-बाठ संस्कृति और राजसी वैभव का अनोखा  उदाहरण Jaipur City Palace, 3 मिनट के वीडियो में देखे 300 साल पुराना इतिहास

 

राजस्थान की राजधानी जयपुर सिर्फ गुलाबी शहर के रूप में ही नहीं, बल्कि अपने समृद्ध इतिहास, वास्तुकला और राजसी विरासत के लिए भी विश्व प्रसिद्ध है। इसी शहर के हृदय में बसा है – सिटी पैलेस, जो न केवल जयपुर की राजशाही का प्रतीक है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक धरोहर का एक अनमोल हिस्सा भी है। आज भी यह महल अपनी भव्यता और ऐतिहासिकता से आने-जाने वालों को मंत्रमुग्ध कर देता है। आइए जानते हैं सिटी पैलेस का इतिहास, वास्तुशिल्प और वह सब कुछ जो इसे एक खास पर्यटन स्थल बनाता है।

<a href=https://youtube.com/embed/_eYZSw6f81Q?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/_eYZSw6f81Q/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden"" title="City Place Jaipur | सिटी पैलेस जयपुर का इतिहास, वास्तुकला, संरचना, कलाशैली, एंट्री फीस, कैसे पहुंचे" width="695">
सिटी पैलेस का निर्माण और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
सिटी पैलेस का निर्माण 1727 में जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने करवाया था। यह वही काल था जब आमेर की राजधानी को स्थानांतरित कर एक नई योजनाबद्ध नगरी जयपुर बसाई गई थी। महाराजा जय सिंह एक कुशल योद्धा होने के साथ-साथ खगोलशास्त्र और वास्तुशास्त्र के ज्ञाता भी थे। उन्होंने महल के निर्माण में उस समय के सर्वश्रेष्ठ वास्तुकारों को लगाया, जिनमें राजस्थानी, मुग़ल और यूरोपीय शैली का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।इस महल का निर्माण मुख्य रूप से राजसी परिवार के निवास और प्रशासनिक कार्यों के लिए किया गया था। वर्षों बाद विभिन्न महाराजाओं ने इसमें अपने-अपने अनुसार विस्तार करवाया, जिससे यह महल एक विशाल परिसर का रूप ले चुका है।

वास्तुशिल्प की भव्यता
सिटी पैलेस का वास्तुशिल्प किसी चमत्कार से कम नहीं है। इसका डिज़ाइन एक विशेष मिश्रण है जिसमें राजपूतों की पारंपरिक शैली, मुग़ल कला की झलक और यूरोपीय डिज़ाइनों का प्रभाव देखा जा सकता है। महल के अंदर प्रवेश करते ही पर्यटक उसकी भव्यता से अभिभूत हो जाते हैं।

यहाँ के मुख्य प्रवेश द्वार – वीरेंद्र पोल, उदय पोल और त्रिपोलिया गेट – राजशाही की गूंज आज भी महसूस कराते हैं। महल के प्रमुख हिस्सों में चंद्र महल, मुबारक महल, दीवान-ए-आम और दीवान-ए-खास प्रमुख हैं।

चंद्र महल: यह सिटी पैलेस का सबसे पुराना और ऊँचा भाग है। इसमें सात मंज़िलें हैं और वर्तमान में यह जयपुर राजघराने के वंशजों का निवास स्थान है।

मुबारक महल: यह एक संग्रहालय में परिवर्तित हो चुका है, जहाँ पर शाही वस्त्रों, पोशाकों और कश्मीरी शॉल्स को प्रदर्शित किया गया है।

दीवान-ए-आम: यहाँ आम जनता से महाराज संवाद किया करते थे, जिसमें सुंदर चित्रकारी और विशाल चांदी के कलश आकर्षण का केंद्र हैं।

दीवान-ए-खास: यहाँ केवल विशेष मेहमानों और राजकीय अतिथियों से बातचीत होती थी।

सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व
सिटी पैलेस केवल एक महल नहीं, बल्कि जयपुर के गौरवशाली अतीत की सजीव गवाही है। यह महल गवाह है उस समय का जब राजघराने शासन की बागडोर संभालते थे और शान-ओ-शौकत से भरे जीवन जीते थे। सिटी पैलेस आज भी जयपुर राजपरिवार के वंशजों का निवास स्थान है और इसलिए यह इतिहास और वर्तमान का एक सुंदर संगम है।यहाँ स्थित संग्रहालयों में दुर्लभ पांडुलिपियाँ, प्राचीन अस्त्र-शस्त्र, कलाकृतियाँ, राजसी पोशाकें और सजे-धजे रथ जैसे अवशेष संरक्षित हैं जो एक युग की झलक पेश करते हैं। संग्रहालय में रखे गए दो विशाल चांदी के कलश ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में दुनिया के सबसे बड़े चांदी के पात्र के रूप में दर्ज हैं।

सिटी पैलेस का आधुनिक महत्व
आज सिटी पैलेस सिर्फ इतिहास की किताबों तक सीमित नहीं है। यह एक प्रमुख पर्यटक स्थल है जहाँ देश-विदेश से लोग इसकी सुंदरता, इतिहास और संस्कृति को निहारने आते हैं। समय के साथ यहाँ आधुनिक व्यवस्थाएं भी की गई हैं जैसे ऑडियो टूर गाइड, इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग, और लाइव पगड़ी बांधने जैसे अनुभवात्मक एक्टिविटीज।साथ ही, सिटी पैलेस शादी और शाही कार्यक्रमों के लिए एक भव्य स्थल बन चुका है। कई नामी हस्तियां यहाँ विवाह और फैशन शूट करवाती हैं जिससे यह स्थान आज भी शाही वैभव से जुड़ा रहता है।

कैसे पहुंचे और क्या देखें?
सिटी पैलेस जयपुर के पुराने शहर (पिंक सिटी) के मध्य में स्थित है। यह हवा महल, जंतर मंतर और अल्बर्ट हॉल म्यूज़ियम जैसे दर्शनीय स्थलों से कुछ ही कदमों की दूरी पर है।
महल में प्रवेश के लिए टिकट लगता है और पर्यटकों को इसे देखने के लिए 2 से 3 घंटे का समय अवश्य देना चाहिए।