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Vijaya Raje Scindia's Birthday आखिर क्यों, दो खेमों में बंटा विजया राजे सिंधिया का जन्मदिन,ये हैं सबसे बड़ा कारण ?

 

विजया राजे सिंधिया का जन्म 12 अक्टूबर 1919 को हुआ था और इनकी मृत्यू 25 जनवरी 2001 को हुई थी। ब्रिटिश राज के दिनों में, ग्वालियर के अंतिम शासक महाराजा जीवाजीराव सिंधिया की पत्नी के रूप में, उन्हें देश के सर्वोच्च शाही व्यक्तियों में से एक माना जाता था। बाद के जीवन में, वह काफी प्रभावशाली राजनीतिज्ञ बन गईं और भारतीय संसद के दोनों सदनों के लिए बार-बार चुनी गईं। वह कई दशकों तक जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी की सक्रिय सदस्य भी रहीं।

भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में से एक विजया राजे सिंधिया की जयंती ग्वालियर में मनाई गई, इस अवसर पर सिंधिया राजवंश की छत्री पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में बीजेपी के कई वरिष्ठ नेता और मंत्री शामिल हुए. इस दौरान महारानी को पुष्पांजलि अर्पित करने में उनकी दोनों बेटियां खेल मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया और राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी शामिल हुईं, लेकिन केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया नदारद रहे.

आयोजन यशोधरा राजे सिंधिया ने किया

यशोधरा राजे सिंधिया द्वारा विजय राजे सिंधिया की जयंती पर आयोजन किया गया, जो हर साल होता है। इस मौके पर राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे सिंधिया भी अपनी मां को श्रद्धांजलि देने पहुंचीं. इसके अलावा वरिष्ठ बीजेपी नेता जयभान सिंह पवैया, गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा, राज्य मंत्री भारत सिंह कुशवाह, सांसद विवेक शेजवलकर, पूर्व मंत्री माया सिंह समेत कई वरिष्ठ बीजेपी नेता अम्मा महाराज को पुष्पांजलि अर्पित करने पहुंचे. इस दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया सबके बीच नजर नहीं आए, जो चर्चा का विषय बन गया. आपको बता दें कि इससे पहले 12 अक्टूबर को केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने परिवार के साथ राजमाता सिंधिया की जयंती मना चुके हैं. इस समय खेल मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया और राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया मौजूद नहीं थीं. अब इसे लेकर मीडिया में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. पढ़िए दो बार जयंती मनाने के पीछे क्या है वजह?

जन्मदिन दो बार क्यों मनाते हैं?

दरअसल विजयाराजे सिंधिया का जन्म 12 अक्टूबर 1919 को करवाचौथ के दिन हुआ था। इस वजह से सिंधिया परिवार के सदस्य इसे अलग-अलग दिन मनाते हैं। राजमाता के पोते और केंद्रीय मंत्री ने 12 अक्टूबर को ही यह जयंती मनाई थी. इसके बाद राजमाता की बेटियों राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और मध्य प्रदेश सरकार की मंत्री यशोधरा राजे ने तिथि के आधार पर रविवार को करवाचौथ पर राजमाता की जयंती मनाई. इस मौके पर कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार ने कहा कि स्वर्गीय राजमाता सिंधिया का व्यक्तित्व सभी को प्रभावित करता है और उन्हें किसी पार्टी के व्यक्ति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, वह किसी पार्टी की नहीं बल्कि जनता की सेवक थीं.