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Usha Priyamvada Birthday उषा प्रियंवदा के जन्मदिन पर जानें इनका जीवन परिचय

 

साहित्य न्यूज डेस्क !! उषा प्रियंवदाहिंदी की उन कथाकारों में से एक हैं, जिनके उल्लेख के बिना हिंदी साहित्य का इतिहास पूरा नहीं होता। वह आज एक सशक्त कहानीकार हैं।

परिचय

उषा प्रियंवदा का जन्म 24 दिसंबर 1930 को उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुआ था। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से की। अंग्रेजी की विदुषी उषा जी की रचनाओं से हिन्दी साहित्य कोश सदैव समृद्ध रहा। उषा प्रियंवदा की गिनती उन कथाकारों में होती है जिन्होंने आधुनिक जीवन की ऊब, बेचैनी, घबराहट और अकेलेपन की स्थिति को पहचाना और व्यक्त किया है। यही कारण है कि एक ओर उनकी रचनाओं में आधुनिकता का तीखा स्वर है तो दूसरी ओर हर वर्ग के पाठक उसमें होने वाली विचित्र घटनाओं और संवेदनाओं से तादात्म्य का अनुभव करते हैं।

कार्य क्षेत्र

दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज और 'इलाहाबाद विश्वविद्यालय' में तीन साल तक पढ़ाने के बाद, वह फुलब्राइट छात्रवृत्ति पर अमेरिका चले गए, जहाँ उन्होंने ब्लूमिंगटन, इंडियाना में दो साल तक पोस्ट-डॉक्टरल पढ़ाई की। सम्प्रति विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय, मैडिसन में दक्षिण एशियाई विभाग में प्रोफेसर के रूप में सेवानिवृत्त हुईं।[1]

प्रमुख कृतियाँ

उषा जी के कथा साहित्य में शहरी परिवारों के अत्यंत भावपूर्ण चित्रण हैं तथा आधुनिक जीवन की उदासी, अकेलेपन, ऊब आदि का चित्रण करते हुए उन्होंने गहरी यथार्थवादिता का परिचय दिया है। उनके कुछ प्रमुख कार्य इस प्रकार हैं-

कहानी संग्रह

  • 'ज़िंदगी और गुलाब के फूल'
  • 'एक कोई दूसरा'
  • 'मेरी प्रिय कहानियां'

उपन्यास

  • 'पचपन खंभे'
  • 'लाल दीवारें'
  • 'रुकोगी नहीं राधिका'
  • 'शेष यात्रा'
  • 'अंतर्वंशी'