कमाई के मामले में भारत का कौन सा राज्य है सबसे आगे ? दिल्ली वाले कहाँ खड़े हैं, जानें आर्थिक आंकड़े और रैंकिंग
जब देश के सबसे अमीर शहर या राज्य की बात होती है, तो अक्सर दिल्ली की चमक-दमक या "सपनों के शहर"—मुंबई—का ख्याल आता है। दिल्ली सरकार द्वारा पेश किए गए एक आर्थिक सर्वेक्षण के हालिया आंकड़ों ने एक बार फिर इस बहस को हवा दे दी है कि कमाई के मामले में देश का कौन सा कोना सचमुच सबसे आगे है। क्या दिल्ली वाले सचमुच सबसे ज़्यादा कमाते हैं, या मुंबई के अमीर लोग बाज़ी मार ले जाते हैं? इन आंकड़ों में छिपी सच्चाई यह भी बताती है कि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे बड़े राज्यों में आम आदमी की खर्च करने लायक आय (disposable income) की तुलना महानगरों में रहने वाले लोगों से कैसी है।
दिल्ली की आर्थिक राह और बढ़ता बजट
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की अर्थव्यवस्था—खासकर सकल घरेलू उत्पाद (GDP)—अब ₹13 लाख करोड़ का आंकड़ा पार कर चुकी है। इस बड़ी छलांग का सीधा असर दिल्ली के बजट पर पड़ने की उम्मीद है, जिसके ₹1 लाख करोड़ से ज़्यादा होने का अनुमान है। हालांकि, उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्यों की तुलना में यह बजटीय आंकड़ा छोटा लग सकता है, लेकिन दिल्ली की अपेक्षाकृत कम आबादी के नज़रिए से देखने पर यह अब तक का सबसे बड़ा और सबसे असरदार बजट साबित होता है। दिल्ली को देश के दूसरे राज्यों से अलग करने वाली यही आर्थिक मज़बूती है।
दिल्ली बनाम मुंबई: प्रति व्यक्ति आय की तुलना
कमाई की इस दौड़ में दिल्ली और मुंबई के बीच हमेशा से कड़ी टक्कर रही है। दिल्ली के ताज़ा आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, राजधानी में एक आम आदमी की अनुमानित सालाना आय (प्रति व्यक्ति आय) ₹5,31,610 है। यह पिछले साल के मुकाबले लगभग 8 प्रतिशत ज़्यादा है और राष्ट्रीय औसत से ढाई गुना ज़्यादा है। हालांकि, जब हम मुंबई की तरफ देखते हैं, तो यह आंकड़ा ₹6.5 लाख के आसपास ठहरता है। दूसरे शब्दों में, सालाना कमाई के मामले में मुंबई के लोग अभी भी दिल्ली वालों से काफी आगे हैं—भले ही दिल्ली की आबादी मुंबई से काफी ज़्यादा हो।
चेन्नई, कोलकाता और बेंगलुरु की स्थिति
देश के दूसरे महानगरों की आर्थिक स्थिति दिल्ली और मुंबई जितनी मज़बूत नहीं है। दक्षिण भारत के एक बड़े केंद्र—चेन्नई—में सालाना प्रति व्यक्ति आय लगभग ₹3.50 लाख है। इस बीच, कोलकाता इस दौड़ में सबसे पीछे नज़र आता है, जहाँ एक आम आदमी की सालाना कमाई महज़ ₹1.55 लाख है। दिलचस्प बात यह है कि बेंगलुरु अब इन सभी महानगरों को कड़ी टक्कर दे रहा है। एक टेक्नोलॉजी हब होने के नाते, बेंगलुरु की प्रति व्यक्ति आय कई मामलों में इन पारंपरिक महानगरों के आँकड़ों को पीछे छोड़ती नज़र आती है।
उत्तर प्रदेश में आम आदमी की कमाई दोगुनी हुई
उत्तर प्रदेश—देश का सबसे ज़्यादा आबादी वाला राज्य—ने पिछले कुछ सालों में अपनी आर्थिक स्थिति में काफ़ी सुधार किया है। 2025-26 के आर्थिक सर्वेक्षण के आँकड़े बताते हैं कि UP में प्रति व्यक्ति आय अब ₹1.26 लाख तक पहुँच गई है। एक राहत की बात यह है कि पिछले आठ सालों में राज्य के निवासियों की कमाई दोगुनी हो गई है। हालाँकि यह आँकड़ा दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों की तुलना में काफ़ी कम है—और लगभग राष्ट्रीय औसत के आस-पास ही है—फिर भी विकास की रफ़्तार साफ़ तौर पर दिखाई देती है।
इस सूची में बिहार कहाँ खड़ा है
कमाई के इस पूरे परिदृश्य में, बिहार की स्थिति सबसे ज़्यादा चिंताजनक बनी हुई है। हाल के आँकड़ों के अनुसार, बिहार में सालाना प्रति व्यक्ति आय महज़ ₹76,490 है। यह आँकड़ा न केवल महानगरों से काफ़ी पीछे है, बल्कि राष्ट्रीय औसत से भी काफ़ी नीचे है। बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में प्रति व्यक्ति आय कम होने का मुख्य कारण उनकी विशाल आबादी और साथ ही औद्योगिक विकास की धीमी रफ़्तार है। कमाई के मामले में, बिहार के लगभग सात लोगों की कुल कमाई दिल्ली के सिर्फ़ एक व्यक्ति की कमाई के बराबर है।
राष्ट्रीय औसत और समृद्धि का पैमाना
जब पूरे भारत के नज़रिए से देखा जाता है, तो यह तथ्य कि दिल्ली की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से 2.5 गुना ज़्यादा है, यह दर्शाता है कि राजधानी में संसाधनों और अवसरों का वितरण ज़्यादा समान रूप से हुआ है। हालाँकि, मुंबई का ₹6.5 लाख का आँकड़ा इस बात का सबूत है कि देश की "आर्थिक राजधानी" का ख़िताब अभी भी मज़बूती से उसी के पास है। कोलकाता जैसे शहरों का पिछड़ना उनकी विशिष्ट आर्थिक नीतियों और बदलती औद्योगिक प्राथमिकताओं के प्रभाव की ओर इशारा करता है। कुल मिलाकर, कमाई की यह दौड़ महज़ आँकड़ों का खेल नहीं है; यह राज्यों के बीच मौजूद आर्थिक खाई को भी उजागर करती है।