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रेलवे के M1, M2, M3 कोच का मतलब क्या है? यात्रियों की बड़ी कन्फ्यूजन दूर

 

 Indian Railways में सफर करने वाले यात्रियों ने अक्सर ट्रेन के डिब्बों पर S1, B1, A1, D1 जैसे कोड्स देखे होंगे। ये कोड्स कोच की श्रेणी और उसकी पहचान बताते हैं, जिससे यात्रियों को अपनी सीट और सुविधा समझने में आसानी होती है। लेकिन हाल के समय में M1, M2 और M3 जैसे कोड्स को लेकर काफी भ्रम देखा जा रहा है।

कई यात्री इन कोड्स को देखकर यह समझ नहीं पाते कि यह सामान्य थर्ड एसी (3AC) कोच है या कोई अलग श्रेणी। इसी कन्फ्यूजन के चलते कई बार लोग गलत डिब्बे में चढ़ जाते हैं, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है।

दरअसल, रेलवे में ‘M’ से शुरू होने वाले कोच का मतलब होता है AC 3-Tier Economy, जिसे थर्ड एसी इकोनॉमी क्लास भी कहा जाता है। यह एक किफायती एसी कोच है, जिसे खास तौर पर उन यात्रियों के लिए शुरू किया गया है जो कम किराए में आरामदायक सफर करना चाहते हैं।

AC 3-Tier Economy कोच, सामान्य 3AC कोच से थोड़ा अलग होता है। इसमें सीटों (बर्थ) की संख्या ज्यादा होती है, जिससे प्रति यात्री किराया कम रखा जाता है। जहां सामान्य 3AC कोच में लगभग 72 बर्थ होती हैं, वहीं इस इकोनॉमी कोच में करीब 80 बर्थ तक हो सकती हैं। इसका मतलब है कि सीटों के बीच जगह थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन जरूरी सुविधाएं लगभग वही रहती हैं।

इन कोचों में यात्रियों को एसी, मोबाइल चार्जिंग पॉइंट, रीडिंग लाइट जैसी सुविधाएं मिलती हैं। कुछ ट्रेनों में बेडरोल की सुविधा भी उपलब्ध होती है, हालांकि यह ट्रेन के प्रकार और दूरी पर निर्भर करता है।

M1, M2, M3 जैसे कोड्स दरअसल कोच की सीरियल संख्या को दर्शाते हैं। यानी अगर ट्रेन में एक से ज्यादा AC 3-Tier Economy कोच हैं, तो उन्हें अलग-अलग पहचान देने के लिए यह नंबर दिए जाते हैं। उदाहरण के तौर पर M1 पहला कोच, M2 दूसरा और M3 तीसरा इकोनॉमी एसी कोच होता है।

रेलवे विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रा से पहले टिकट पर लिखे कोच और सीट नंबर को ध्यान से पढ़ना चाहिए। साथ ही स्टेशन पर लगे कोच पोजिशन डिस्प्ले बोर्ड या रेलवे स्टाफ से जानकारी लेकर सही डिब्बे में चढ़ना चाहिए।

फिलहाल, M कोच को लेकर फैली कन्फ्यूजन धीरे-धीरे दूर हो रही है, लेकिन यात्रियों को अभी भी सतर्क रहने की जरूरत है ताकि उनका सफर आरामदायक और बिना किसी परेशानी के पूरा हो सके।