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TMC में बगावत तेज, ‘पैरेलल वर्किंग कमेटी’ का ऐलान; वीडियो में जाने  ममता बनर्जी के लिए नई चुनौती

 

पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (All India Trinamool Congress) के भीतर असंतोष और गुटबाजी तेज हो गई है। सोमवार को पार्टी के भीतर एक बागी समूह ने खुलकर अलग संगठनात्मक ढांचा घोषित कर दिया।

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‘पैरेलल वर्किंग कमेटी’ का गठन

बागी गुट के नेता Ritabrata Banerjee ने कोलकाता में आयोजित एक विशेष अधिवेशन के बाद TMC की एक समानांतर (parallel) वर्किंग कमेटी के गठन की घोषणा की। इस कदम को पार्टी नेतृत्व के लिए गंभीर चुनौती माना जा रहा है। बैठक में विधायक, पार्षद और अन्य स्थानीय नेता शामिल हुए, जिन्होंने नई संरचना को समर्थन दिया।

अरूप रॉय बने अध्यक्ष

इस नई कथित कमेटी में विधायक Arup Roy को अध्यक्ष चुना गया है। वहीं संगठनात्मक ढांचे के तहत कई वरिष्ठ नेताओं को भी जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

वरिष्ठ नेताओं को भी जिम्मेदारी

बागी गुट द्वारा घोषित संरचना में पूर्व मंत्री Arup Biswas, Firhad Hakim, रथिन घोष और सबीना यास्मीन को वाइस-चेयरमैन बनाया गया है।इसके अलावा ऋतब्रत बनर्जी, जावेद खान और संदीपन साहा को जनरल सेक्रेटरी की जिम्मेदारी दी गई है।

ममता बनर्जी पर दबाव बढ़ा

इस पूरे घटनाक्रम को TMC प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। बागी गुट ने दावा किया है कि उनका उद्देश्य संगठन को मजबूत करना है, हालांकि इसे पार्टी में आंतरिक विभाजन के रूप में भी देखा जा रहा है।

“दीदी सलाहकार बन सकती हैं” बयान

ऋतब्रत बनर्जी ने मीडिया से बातचीत में यह भी कहा कि यदि ममता बनर्जी चाहें तो उन्हें इस नई कमेटी में मुख्य सलाहकार की भूमिका दी जा सकती है। इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

आगे की सियासी स्थिति पर नजर

TMC के भीतर इस तरह की समानांतर संरचना के ऐलान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। अब सभी की नजर पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया और आने वाले दिनों में इस विवाद के विस्तार पर टिकी है।