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नंदीग्राम फिर बना सियासी अखाड़ा, सुवेंदु अधिकारी बनाम टीएमसी उम्मीदवार; 2021 की हार-जीत फिर चर्चा में

 

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर नंदीग्राम विधानसभा सीट सुर्खियों में है। यह सीट लंबे समय से राज्य की सियासी लड़ाई का केंद्र रही है—चाहे वाममोर्चा का दौर हो या तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का शासनकाल।

इस बार के विधानसभा चुनाव में भी नंदीग्राम पर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और मौजूदा विधायक सुवेंदु अधिकारी एक बार फिर इस सीट से मैदान में हैं। उनके सामने तृणमूल कांग्रेस (तृणमूल कांग्रेस) ने अपने उम्मीदवार को उतारा है, जिससे मुकाबला और भी रोचक हो गया है।

टीएमसी की ओर से इस बार सुवेंदु अधिकारी के ही पूर्व सहयोगी रहे एक नेता को उम्मीदवार बनाया गया है, जिससे राजनीतिक समीकरण और अधिक जटिल हो गए हैं। यह चुनाव अब केवल दो उम्मीदवारों की लड़ाई नहीं बल्कि पुराने राजनीतिक संबंधों और रणनीतिक ताकत का भी परीक्षण माना जा रहा है।

गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने 2021 के विधानसभा चुनाव में इसी नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें सुवेंदु अधिकारी से कड़े मुकाबले में 1956 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। यह परिणाम उस समय पूरे राज्य की राजनीति में बड़ा मोड़ माना गया था।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में नंदीग्राम हमेशा से प्रतीकात्मक और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण सीट रही है। यहां की जीत-हार अक्सर राज्य की राजनीतिक दिशा का संकेत मानी जाती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस बार का मुकाबला भी बेहद करीबी और हाई-प्रोफाइल रहने की संभावना है। दोनों दलों ने अपनी पूरी ताकत इस सीट पर झोंक दी है और प्रचार अभियान तेजी से चल रहा है।

फिलहाल, नंदीग्राम एक बार फिर राज्य की सबसे चर्चित विधानसभा सीट बन गई है, जहां हर बयान और हर रैली पर राजनीतिक हलकों की नजरें टिकी हुई हैं।