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अस्सलाम वालेकुम’ और ‘इंशाल्लाह’ बोलने पर IPS का ट्रांसफर? वीडियो में जाने अजहरुद्दीन ने उठाए सवाल, कहा- अल्पसंख्यकों को क्या संदेश दे रहे हैं?

 

पश्चिम बंगाल की IPS अधिकारी बुशरा बानो के तबादले को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। पूर्व क्रिकेटर और सांसद मोहम्मद अजहरुद्दीन ने इस मामले पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर किसी लोक सेवक के अभिवादन को उसके खिलाफ कार्रवाई का आधार बनाया जाता है, तो यह गंभीर सवाल खड़ा करता है कि देश के अल्पसंख्यक समुदाय को किस तरह का संदेश दिया जा रहा है। हालांकि, पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से इस तबादले को नियमित प्रशासनिक फेरबदल बताया गया है।

बुशरा बानो का तबादला ऐसे समय हुआ है जब उनके एक सोशल मीडिया वीडियो को लेकर विवाद चल रहा था। वह पश्चिम मेदिनीपुर के खड़गपुर में एडिशनल एसपी के पद पर तैनात थीं। 14 सितंबर को जारी आदेश के तहत उन्हें राज्य सशस्त्र पुलिस की चौथी बटालियन में डिप्टी कमांडेंट के पद पर भेजा गया। इसी प्रशासनिक फेरबदल में दो अन्य पुलिस अधिकारियों के भी तबादले किए गए।

UPSC अभ्यर्थियों के लिए बनाया था वीडियो

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विवाद की शुरुआत 13 सितंबर को पोस्ट किए गए बुशरा बानो के वीडियो से हुई। इस वीडियो में वह UPSC की तैयारी करने वाले छात्रों का हौसला बढ़ाती नजर आई थीं। उन्होंने अपने सिविल सेवा तक पहुंचने के सफर के बारे में बताया और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की रेजिडेंशियल कोचिंग अकादमी का भी जिक्र किया, जिसने उनकी UPSC तैयारी में मदद की थी।वीडियो में बुशरा बानो ने ‘अस्सलाम वालेकुम’, ‘इंशाल्लाह’ और ‘जजाकल्लाह’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों और संगठनों ने उनके वीडियो पर आपत्ति जताई। एक संगठन की ओर से पश्चिम बंगाल के गृह विभाग के अधिकारियों के समक्ष शिकायत किए जाने की रिपोर्ट भी सामने आई। शिकायत में सार्वजनिक संवाद में राष्ट्रीय अभिव्यक्तियों के इस्तेमाल और अधिकारी की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए गए थे।

ट्रांसफर और वीडियो के बीच संबंध पर विवाद

बुशरा बानो का तबादला वीडियो को लेकर शिकायत सामने आने के कुछ समय बाद हुआ। इसी वजह से विपक्षी नेताओं और कुछ अन्य लोगों ने दोनों घटनाओं के बीच संबंध होने के सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, सरकारी पक्ष से जुड़े अधिकारियों ने इसे नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। इसलिए फिलहाल यह स्पष्ट रूप से स्थापित नहीं है कि तबादले का एकमात्र कारण सोशल मीडिया वीडियो ही था।

अजहरुद्दीन ने क्या कहा?

तेलंगाना के मंत्री और पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद अजहरुद्दीन ने बुशरा बानो के ट्रांसफर पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ‘अस्सलाम वालेकुम’ और ‘इंशाल्लाह’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल को किसी लोक सेवक को निशाना बनाने का आधार बनाया जाना चिंताजनक है। अजहरुद्दीन ने सवाल उठाया कि जब अभिवादन किसी सार्वजनिक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई का आधार बन जाता है, तो यह सोचना जरूरी है कि इससे अल्पसंख्यकों को क्या संदेश जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की ताकत उसकी विविधता में है और पहचान को नियंत्रित करने में नहीं।

इस मामले ने सोशल मीडिया पर भी बहस छेड़ दी है। एक तरफ कुछ लोग सरकारी अधिकारियों के सार्वजनिक संचार में निष्पक्षता और आधिकारिक भूमिका के अनुरूप भाषा इस्तेमाल करने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आलोचक सवाल उठा रहे हैं कि धार्मिक अभिवादन को तबादले से जोड़ना उचित है या नहीं। बुशरा बानो का विवादित वीडियो अब उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर उपलब्ध नहीं है।