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बंगाल: SIR में वोटिंग अधिकार खोने वालों पर 'डबल अटैक', सुवेंदु सरकार ने कल्याणकारी योजनाओं से काटे नाम
 

 

West Bengal में Suvendu Adhikari के बयान के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। आरोप है कि Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के तहत वोटिंग अधिकार खोने वाले कुछ लोगों के नाम अब राज्य की कल्याणकारी योजनाओं से भी हटाए जा रहे हैं, जिसे विपक्ष “डबल अटैक” बता रहा है।

मामले को लेकर राज्य की राजनीति में तीखी बहस छिड़ गई है। विपक्षी दलों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटता है, तो उसे कल्याणकारी योजनाओं से वंचित करना सामाजिक न्याय के खिलाफ है। उनका आरोप है कि इससे आम लोगों पर दोहरी मार पड़ रही है।

वहीं Suvendu Adhikari की ओर से कहा गया है कि जिन लोगों के नाम SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटे हैं, उनकी पात्रता की पुनः जांच की जा रही है और नियमों के अनुसार ही लाभ दिया जाएगा।

West Bengal प्रशासन का कहना है कि यह प्रक्रिया पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल पात्र नागरिकों तक ही पहुंचे। हालांकि इस कदम के सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव को लेकर बहस तेज हो गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदाता सूची संशोधन और कल्याणकारी योजनाओं की पात्रता को जोड़ना एक संवेदनशील मुद्दा है, जो आने वाले समय में राज्य की राजनीति को और प्रभावित कर सकता है।

इस पूरे विवाद के बीच आम लोगों में भी चिंता देखी जा रही है, खासकर उन परिवारों में जिनका नाम हाल ही में सूची से हटाया गया है। कई लोग स्थिति स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं।

फिलहाल मामला प्रशासनिक जांच और राजनीतिक बयानबाजी के बीच उलझा हुआ है, और इस पर अंतिम स्थिति आगे की सरकारी स्पष्टीकरण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।