गढ़वाल यूनिवर्सिटी में NSUI की जीत को वेणुगोपाल ने बताया BJP की हार, बोले- 2027 में उत्तराखंड से जाएगी भाजपा सरकार
उत्तराखंड में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले छात्र राजनीति के एक नतीजे ने सियासी माहौल गरमा दिया है। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के पौड़ी कैंपस में छात्रसंघ चुनाव में NSUI की जीत को कांग्रेस ने भाजपा के लिए बड़ा झटका बताया है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस जीत को भाजपा की हार बताते हुए दावा किया कि इसका असर आने वाले विधानसभा चुनाव में भी दिखाई देगा।
केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि गढ़वाल यूनिवर्सिटी चुनाव में NSUI की शानदार जीत भाजपा की करारी हार है। उन्होंने दावा किया कि उत्तराखंड की जनता भाजपा की नीतियों से परेशान है और यह चुनाव युवाओं तथा छात्रों के बीच बदलते राजनीतिक माहौल का संकेत है। वेणुगोपाल ने इसी आधार पर 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सरकार बनने की भविष्यवाणी भी की।
गढ़वाल विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव में NSUI के प्रदर्शन को कांग्रेस इसलिए भी अहम मान रही है क्योंकि पौड़ी गढ़वाल को भाजपा का मजबूत क्षेत्र माना जाता है। हालिया छात्र राजनीति में NSUI ने यहां अपनी स्थिति मजबूत की है। बिड़ला परिसर के छात्रसंघ चुनाव में NSUI के मयंक बहुगुणा ने सचिव पद पर जीत दर्ज की और ABVP उम्मीदवार को 300 से ज्यादा मतों से हराया। अध्यक्ष पद पर भी जय हो ग्रुप के हिमांशु भंडारी ने ABVP उम्मीदवार को मात दी।
इस नतीजे के बाद कांग्रेस नेताओं ने इसे सिर्फ छात्रसंघ चुनाव तक सीमित नहीं माना। पार्टी का कहना है कि युवाओं के बीच भाजपा के खिलाफ माहौल बन रहा है। हालांकि छात्रसंघ चुनाव के नतीजों को सीधे विधानसभा चुनाव का संकेत मानना राजनीतिक आकलन है और इसकी वास्तविक परीक्षा राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव में ही होगी।
वेणुगोपाल ने अपने बयान में आगामी दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि वहां भी NSUI को बड़ी जीत मिलेगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि 2027 में उत्तराखंड की जनता भाजपा को सत्ता से बाहर कर कांग्रेस को मौका देगी।
उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव अगले साल की शुरुआत में होने की उम्मीद है। राज्य में कुल 70 विधानसभा सीटें हैं और मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल मार्च 2027 में समाप्त होगा। भाजपा लगातार सत्ता में वापसी की तैयारी कर रही है, जबकि कांग्रेस सत्ता में लौटने के लिए संगठन और चुनावी रणनीति को मजबूत करने में जुटी है।
ऐसे में गढ़वाल विश्वविद्यालय का छात्रसंघ चुनाव आने वाले महीनों में राजनीतिक बहस का हिस्सा बना रह सकता है। कांग्रेस इसे युवाओं के बीच बदलाव की शुरुआत बता रही है, जबकि विधानसभा चुनाव में इसका कितना असर पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल केसी वेणुगोपाल के बयान ने उत्तराखंड की सियासत में चुनावी चर्चा को जरूर तेज कर दिया है।