UPNL कर्मचारियों का आरोप- जबरन कराया जा रहा अनुबंध, आदेश न मानने पर वेतन कटौती और सेवा में ब्रेक
उत्तराखंड उपनल कर्मचारी संघ ने हाई कोर्ट में सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। संघ की ओर से अदालत में कहा गया कि सरकार उपनल कर्मचारियों से जबरन अनुबंध करवाने का दबाव बना रही है। जो कर्मचारी इस प्रक्रिया का पालन करने से इनकार कर रहे हैं, उनके खिलाफ कथित तौर पर वेतन काटने या सेवा में ब्रेक देने जैसी कार्रवाई की जा रही है।
मामला उपनल के जरिए विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवा शर्तों और उनके भविष्य से जुड़ा है। हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान कर्मचारियों की ओर से सरकार के उस कदम पर आपत्ति जताई गई, जिसके तहत आउटसोर्स कर्मचारियों को कॉन्ट्रैक्चुअल कर्मचारी का दर्जा देने के लिए अनुबंध संबंधी प्रक्रिया पूरी कराई जा रही है।
कर्मचारियों ने जताई जबरन प्रक्रिया की आपत्ति
हाई कोर्ट के सामने कर्मचारियों की ओर से कहा गया कि अनुबंध का फॉर्म भरना कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक प्रक्रिया नहीं रह गई है। कर्मचारियों का आरोप है कि जो लोग सरकार के निर्देश के मुताबिक अनुबंध करने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं, उन्हें आर्थिक और सेवा संबंधी कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।
इस मामले में सरकार की ओर से पहले अदालत को बताया गया था कि कैबिनेट के फैसले के बाद पात्र आउटसोर्स कर्मचारियों को कॉन्ट्रैक्चुअल स्टेटस देने की प्रक्रिया शुरू की गई है। सरकार के अनुसार, यह कदम आगे चलकर 2013 के नियमितीकरण नियमों के दायरे में पात्र कर्मचारियों को लाने की दिशा में पहला चरण है।
नियमितीकरण का मुद्दा भी अहम
UPNL कर्मचारियों का लंबे समय से नियमितीकरण और समान काम के लिए समान वेतन का मुद्दा अदालतों में उठता रहा है। मार्च 2026 के एक मामले में हाई कोर्ट ने 2018 के कुंदन सिंह बनाम उत्तराखंड सरकार फैसले का उल्लेख करते हुए कहा था कि उस फैसले में UPNL के जरिए कार्यरत कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से नियमित करने और न्यूनतम वेतनमान के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, अदालत को बताया गया कि सरकार की ओर से जारी बाद के आदेश में न्यूनतम वेतनमान का प्रावधान तो किया गया, लेकिन नियमितीकरण को लेकर स्पष्ट व्यवस्था नहीं थी।
अब कर्मचारियों की ओर से अनुबंध प्रक्रिया को लेकर उठाई गई आपत्ति ने इस पूरे विवाद को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। हाई कोर्ट में कर्मचारियों के आरोपों और सरकार के पक्ष के आधार पर आगे की सुनवाई में स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।