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उत्तराखंड में फिर मंडरा रहा आपदा का खतरा, 49 जगहों पर मिले तबाही के संकेत; 11 हाई रिस्क जोन

 

उत्तराखंड में एक बार फिर बड़ी प्राकृतिक आपदा का खतरा बढ़ता दिखाई दे रहा है। प्रदेश में 49 ऐसे स्थान चिन्हित किए गए हैं, जहां आपदा के संभावित संकेत मिले हैं। इनमें 11 जगहों को हाई रिस्क जोन के रूप में देखा जा रहा है। हालात को देखते हुए चारधाम यात्रा पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

मानसून के दौरान उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश होने से भूस्खलन, भू-धंसाव और अचानक बाढ़ जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। कई स्थानों पर जमीन खिसकने और पहाड़ी हिस्सों में अस्थिरता के संकेत मिलने के बाद प्रशासन और आपदा प्रबंधन तंत्र की चिंता बढ़ गई है।

11 स्थान हाई रिस्क जोन में

चिन्हित 49 स्थानों में से 11 को हाई रिस्क जोन माना गया है। इन क्षेत्रों में किसी भी समय हालात बिगड़ने की आशंका बनी हुई है। लगातार बारिश के बीच इन स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों में जरूरी एहतियाती कदम उठाने की तैयारी की जा रही है।

उत्तराखंड पहले भी मानसून के दौरान अचानक आई आपदाओं का सामना कर चुका है। ऐसे में धराली जैसी घटना की आशंका ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है। पहाड़ों में भारी बारिश के दौरान नदियों और गदेरों का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है, जबकि भूस्खलन के कारण सड़क और संपर्क मार्ग बंद होने का खतरा रहता है।

चारधाम यात्रा पर भी असर की आशंका

उत्तराखंड में चल रही चारधाम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहाड़ी मार्गों से गुजर रहे हैं। ऐसे में संवेदनशील क्षेत्रों में मौसम खराब होने पर यात्रियों की सुरक्षा चुनौती बन सकती है। भूस्खलन या सड़क बंद होने की स्थिति में श्रद्धालुओं को रास्ते में फंसने की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

प्रशासन की ओर से यात्रियों को मौसम की स्थिति और स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी के अनुसार ही यात्रा करने की सलाह दी जा रही है। संवेदनशील मार्गों पर स्थिति बिगड़ने की स्थिति में यातायात को रोकने या वैकल्पिक मार्ग अपनाने का फैसला भी लिया जा सकता है।

लगातार निगरानी की जरूरत

आपदा के संभावित खतरे को देखते हुए संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाना जरूरी हो गया है। मौसम विभाग की चेतावनियों, बारिश की स्थिति और पहाड़ी क्षेत्रों में जमीन की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन का प्रयास है कि किसी भी अप्रिय स्थिति से पहले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।

फिलहाल 49 संवेदनशील स्थानों और 11 हाई रिस्क जोन को लेकर प्रशासन सतर्क है। मानसून के दौरान मौसम तेजी से बदलने के कारण लोगों और चारधाम यात्रियों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। उत्तराखंड में धराली जैसी आपदा की आशंका के बीच आने वाले दिनों में मौसम और पहाड़ी क्षेत्रों की स्थिति पर सभी की नजर बनी रहेगी।