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दिल्ली में GRAP-1 लागू होने का उत्तराखंड पर भी असर, रोडवेज की पुरानी बसों की एंट्री पर रोक, इन बसों को मिलेगी छूट

 

दिल्ली में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP-1) के तहत लागू प्रतिबंधों का असर अब उत्तराखंड की रोडवेज बसों पर भी देखने को मिलेगा। दिल्ली में प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से पुरानी बसों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है। इसके तहत उत्तराखंड रोडवेज की पुरानी बसों को दिल्ली में प्रवेश नहीं मिलेगा। हालांकि, इलेक्ट्रिक, सीएनजी और बीएस-6 मानक वाली डीजल बसों को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है। इस फैसले के चलते उत्तराखंड से दिल्ली आने-जाने वाले यात्रियों और परिवहन विभाग को अपनी व्यवस्थाओं में बदलाव करना पड़ सकता है।

पुरानी रोडवेज बसों की दिल्ली में एंट्री पर रोक

दिल्ली में वायु गुणवत्ता खराब होने के बाद प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए विभिन्न उपाय किए जाते हैं। इसी क्रम में वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने पर जोर दिया जा रहा है। उत्तराखंड रोडवेज की ऐसी बसें, जो निर्धारित मानकों के दायरे में नहीं आती हैं, उन्हें दिल्ली में प्रवेश की अनुमति नहीं मिलेगी।

इस प्रतिबंध का असर उन बसों पर पड़ सकता है, जो उत्तराखंड के अलग-अलग शहरों से यात्रियों को लेकर दिल्ली पहुंचती हैं। परिवहन विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि दिल्ली जाने वाले मार्गों पर निर्धारित मानकों के अनुरूप बसों का ही संचालन किया जाए।

इलेक्ट्रिक, सीएनजी और बीएस-6 बसों को राहत

इस व्यवस्था में इलेक्ट्रिक, सीएनजी और बीएस-6 मानक वाली डीजल बसों को छूट दी गई है। इन बसों को दिल्ली में प्रवेश की अनुमति होगी। इससे स्पष्ट है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए स्वच्छ ईंधन और निर्धारित उत्सर्जन मानकों वाले वाहनों को प्राथमिकता दी जा रही है।

इलेक्ट्रिक बसें चलने के दौरान सीधे तौर पर धुएं का उत्सर्जन नहीं करतीं, जबकि सीएनजी और आधुनिक उत्सर्जन मानकों वाली डीजल बसों से प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, वाहनों का वास्तविक प्रदूषण उनके रखरखाव और परिचालन की स्थिति पर भी निर्भर करता है।

उत्तराखंड रोडवेज की व्यवस्था पर पड़ेगा असर

दिल्ली उत्तराखंड के लिए एक प्रमुख परिवहन केंद्र है। राज्य के कई शहरों से रोजाना बड़ी संख्या में यात्री बसों के जरिए राजधानी पहुंचते हैं। ऐसे में पुरानी बसों के प्रवेश पर रोक लगने से परिवहन विभाग को बसों के बेड़े और संचालन की योजना पर ध्यान देना होगा।

यात्रियों के लिए यह जानना जरूरी होगा कि उनकी यात्रा में इस्तेमाल होने वाली बस निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं। यदि किसी मार्ग पर पुरानी बसों का संचालन बंद करना पड़ता है, तो उपलब्ध बसों की संख्या और समय-सारणी पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, बसों के फेरे या सेवाओं में बदलाव को लेकर अभी उपलब्ध जानकारी में कोई स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है।

प्रदूषण नियंत्रण पर जोर

दिल्ली में GRAP के तहत उठाए जाने वाले कदमों का उद्देश्य वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना है। वाहनों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में शामिल है, इसलिए सार्वजनिक परिवहन में स्वच्छ ईंधन और बेहतर उत्सर्जन मानकों वाली बसों का इस्तेमाल महत्वपूर्ण माना जाता है।

उत्तराखंड रोडवेज के लिए अब दिल्ली में बस संचालन के दौरान निर्धारित नियमों का पालन करना जरूरी होगा। इससे यात्रियों को होने वाली संभावित असुविधा और परिवहन सेवाओं में बदलाव की स्थिति पर नजर रहेगी।