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सुप्रीम कोर्ट का अहम रुख: “जमानत नियम, जेल अपवाद” सिद्धांत फिर दोहराया, UAPA मामलों पर भी लागू

 

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए “जमानत नियम है और जेल अपवाद” के सिद्धांत को एक बार फिर दोहराया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह सिद्धांत Bail is the rule, jail is the exception केवल सामान्य आपराधिक मामलों तक सीमित नहीं है, बल्कि गंभीर कानूनों जैसे Unlawful Activities (Prevention) Act (UAPA) के मामलों में भी लागू होता है।

अदालत की यह टिप्पणी उन मामलों की सुनवाई के दौरान सामने आई, जिनमें पहले दिए गए जमानत से जुड़े निर्णयों पर सवाल उठाए गए थे। विशेष रूप से Umar Khalid और Sharjeel Imam की जमानत खारिज करने से जुड़े पुराने फैसले पर अदालत ने गंभीर आपत्ति जताई।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि किसी भी आरोपी को लंबे समय तक बिना ट्रायल के जेल में रखना न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ हो सकता है, और हर मामले में तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय जरूरी है।

हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि गंभीर आरोपों में जमानत स्वतः मिल जानी चाहिए, बल्कि जांच की स्थिति, साक्ष्यों की प्रकृति और मुकदमे की प्रगति को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाना चाहिए।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी भविष्य में UAPA और अन्य गंभीर मामलों में जमानत से जुड़े मामलों पर बड़ा प्रभाव डाल सकती है। इससे अदालतों को अधिक संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की दिशा मिल सकती है।

सरकारी पक्ष और बचाव पक्ष दोनों के लिए यह निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह न्यायिक प्रक्रिया में स्वतंत्रता और सुरक्षा के बीच संतुलन की बहस को फिर से केंद्र में लाता है।

फिलहाल, इस मामले में आगे की विस्तृत सुनवाई जारी है और अंतिम निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।