उत्तराखंड में इंटरनेशनल बॉर्डर पर सख्ती: नेपाली पोर्टरों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, सरकार ने लागू किए नए नियम
उत्तराखंड सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इनर लाइन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया है। नए निर्देशों के तहत अब नेपाली पोर्टरों को विदेशी नागरिक के रूप में अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन कराना होगा। सरकार ने सुरक्षा और निगरानी को मजबूत करने के लिए चार महत्वपूर्ण बिंदुओं को लागू किया है।
सरकारी निर्देशों के अनुसार, सीमा से जुड़े संवेदनशील इलाकों में काम करने वाले नेपाली पोर्टरों और अन्य विदेशी नागरिकों का पूरा रिकॉर्ड प्रशासन के पास होना जरूरी होगा। इसके लिए पहचान संबंधी दस्तावेज, निवास की जानकारी और कार्य से जुड़ी डिटेल उपलब्ध करानी होगी।
प्रशासन का कहना है कि इंटरनेशनल बॉर्डर से लगे क्षेत्रों में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। इनर लाइन क्षेत्रों में आने-जाने वाले लोगों की निगरानी बढ़ाने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए नई व्यवस्था लागू की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, नए नियमों के तहत पोर्टरों को स्थानीय प्रशासन और पुलिस के पास पंजीकरण कराना होगा। बिना रजिस्ट्रेशन के काम करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
सरकार द्वारा तय किए गए चार प्रमुख बिंदुओं में पहचान सत्यापन, स्थानीय पते का रिकॉर्ड, कार्य क्षेत्र की जानकारी और प्रशासनिक अनुमति जैसी प्रक्रियाएं शामिल बताई जा रही हैं। इससे सीमा क्षेत्रों में आने-जाने वाले लोगों की गतिविधियों पर निगरानी रखना आसान होगा।
सीमा से जुड़े इलाकों में अक्सर नेपाली पोर्टर और मजदूर काम करते हैं, खासकर पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों में सामान ढोने और पर्यटन गतिविधियों से जुड़े कार्यों में उनकी अहम भूमिका होती है। ऐसे में सरकार अब सुरक्षा कारणों से उनकी विस्तृत जानकारी एकत्र करने पर जोर दे रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि संवेदनशील सीमा क्षेत्रों में पहचान और रिकॉर्ड संबंधी व्यवस्था मजबूत होने से सुरक्षा एजेंसियों को मदद मिलेगी। हालांकि यह भी जरूरी होगा कि नियमों के पालन के दौरान आम कामगारों को अनावश्यक परेशानी न हो।
फिलहाल प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को नए नियमों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं। आने वाले दिनों में सीमावर्ती इलाकों में जांच और सत्यापन अभियान भी तेज किए जा सकते हैं।