देहरादून में रिटायर्ड महिला प्रिंसिपल को 24 दिन रखा डिजिटल अरेस्ट, डॉक्टर बेटे को भी नहीं बताया; 73 लाख रुपये की ठगी
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां साइबर अपराधियों ने एक 73 वर्षीय रिटायर्ड महिला प्रिंसिपल को करीब 24 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा और उनसे 73 लाख रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने महिला को इस कदर डराया कि वह अपने ही घर में मौजूद डॉक्टर बेटे को भी इस मामले की जानकारी नहीं दे सकीं।
पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधियों ने महिला को जांच एजेंसी के नाम पर डराया और लगातार मानसिक दबाव बनाकर रखा। ठगों ने उन्हें विश्वास दिलाया कि वह एक गंभीर मामले में फंस गई हैं और अगर उन्होंने निर्देशों का पालन नहीं किया तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
फर्जी जांच का डर दिखाकर बनाया शिकार
जानकारी के मुताबिक, ठगों ने महिला से संपर्क कर खुद को सरकारी जांच एजेंसी का अधिकारी बताया। उन्होंने महिला को किसी कथित आपराधिक मामले से जोड़ते हुए डराना शुरू किया।
इसके बाद आरोपियों ने वीडियो कॉल और फोन के जरिए महिला पर लगातार नजर रखी। उसे किसी से बात न करने और मामले की जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को न देने के लिए कहा गया।
ठगों ने महिला को यह विश्वास दिलाया कि वह एक गोपनीय जांच का हिस्सा हैं और अगर उन्होंने किसी को इस बारे में बताया तो उन्हें नुकसान हो सकता है।
24 दिन तक चलता रहा डर का खेल
साइबर अपराधियों ने महिला को करीब 24 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट की स्थिति में रखा। इस दौरान महिला मानसिक तनाव में रहीं और ठगों के निर्देशों का पालन करती रहीं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि घर में मौजूद डॉक्टर बेटे को भी उन्होंने इसकी जानकारी नहीं दी। अपराधियों ने उन्हें इतना डरा दिया था कि वह अपने परिवार के लोगों से भी इस बारे में बात करने से बचती रहीं।
धीरे-धीरे ट्रांसफर कराए 73 लाख रुपये
ठगों ने महिला को अलग-अलग कारण बताकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। इसके बाद महिला से कुल 73 लाख रुपये की रकम विभिन्न खातों में जमा कराई गई।
जब महिला को ठगी का एहसास हुआ तो उन्होंने मामले की जानकारी पुलिस को दी। इसके बाद साइबर सेल ने जांच शुरू कर दी है।
पुलिस ने शुरू की जांच
मामला सामने आने के बाद पुलिस ने साइबर अपराधियों की पहचान और पैसे के लेनदेन की जांच शुरू कर दी है। पुलिस बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल गतिविधियों की जानकारी जुटा रही है।
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल अरेस्ट के मामलों में अपराधी डर और दबाव का इस्तेमाल करते हैं। वे पीड़ित को यह विश्वास दिलाते हैं कि वह किसी बड़ी कानूनी परेशानी में फंस गया है।
पुलिस ने लोगों से की सतर्क रहने की अपील
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर अपनी निजी जानकारी, बैंक डिटेल या पैसे साझा न करें। कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के जरिए जांच के नाम पर पैसे जमा करने के लिए नहीं कहती है।
देहरादून का यह मामला एक बार फिर बताता है कि साइबर ठग अब बुजुर्गों और पढ़े-लिखे लोगों को भी अपने जाल में फंसाने के लिए नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में सतर्कता और समय पर शिकायत करना ही साइबर अपराध से बचने का सबसे बड़ा उपाय है।