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एक्सप्रेसवे के किनारे 40 हजार शीशम के पौधे लगा चुके हैं ‘पीपल बाबा’, अगले साल 4 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य

 

पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने की मुहिम में जुटे ‘पीपल बाबा’ ने एक्सप्रेसवे के किनारे बड़े पैमाने पर पौधारोपण करने का दावा किया है। उनका कहना है कि अब तक वे एक्सप्रेसवे के किनारे शीशम के 40 हजार पौधे लगा चुके हैं। अब उनकी योजना अगले साल चार लाख और पौधे लगाने की है। इस पहल के जरिए सड़क किनारे हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है।

पीपल बाबा लंबे समय से पौधारोपण और पेड़ों के संरक्षण से जुड़े अभियान के लिए पहचाने जाते हैं। उनका मानना है कि पेड़-पौधे पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी सोच के साथ वे अलग-अलग स्थानों पर पौधे लगाने के अभियान से जुड़े हुए हैं।

एक्सप्रेसवे के किनारे लगाए 40 हजार पौधे

पीपल बाबा के मुताबिक, अब तक एक्सप्रेसवे के किनारे शीशम के करीब 40 हजार पौधे लगाए जा चुके हैं। सड़क के दोनों ओर हरियाली विकसित करने के उद्देश्य से यह पहल की जा रही है। एक्सप्रेसवे के किनारे पौधारोपण से भविष्य में हरित पट्टी तैयार होने की संभावना है।

शीशम को उपयोगी वृक्षों में गिना जाता है। यह लकड़ी के लिए महत्वपूर्ण होने के साथ पर्यावरण के लिहाज से भी उपयोगी है। हालांकि, पौधारोपण के साथ उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण भी जरूरी है, ताकि लगाए गए पौधे बड़े होकर पेड़ बन सकें।

अगले साल चार लाख पौधे लगाने की योजना

पीपल बाबा ने अगले साल चार लाख और पौधे लगाने की योजना बताई है। यदि यह लक्ष्य पूरा होता है तो उनके अभियान का दायरा और बढ़ेगा। इतनी बड़ी संख्या में पौधारोपण के लिए पौधों की उपलब्धता, उचित स्थान का चयन, सिंचाई और सुरक्षा जैसी व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण होंगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, केवल पौधे लगाना ही पर्यावरण संरक्षण के लिए पर्याप्त नहीं है। पौधों को बचाना, समय-समय पर पानी देना और उनकी सुरक्षा करना भी उतना ही जरूरी है। सड़क किनारे लगाए गए पौधों को वाहनों, पशुओं और मौसम के प्रभाव से बचाने की आवश्यकता होती है।

हरियाली बढ़ाने की दिशा में पहल

एक्सप्रेसवे के किनारे पौधारोपण से भविष्य में सड़क के आसपास हरित क्षेत्र विकसित हो सकता है। पेड़ वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करते हैं और स्थानीय जैव विविधता को सहारा देते हैं। बड़े पैमाने पर पौधारोपण होने से आने वाले वर्षों में इसका सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे सकता है।

फिलहाल 40 हजार पौधे लगाने और अगले साल चार लाख पौधे रोपने का आंकड़ा पीपल बाबा का दावा है। इस अभियान की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि लगाए गए पौधों में से कितने सुरक्षित रहकर पेड़ों के रूप में विकसित हो पाते हैं।