गंगा दशहरा पर हरिद्वार में उमड़ा आस्था का सैलाब, फुटेज में देंखे हरकी पैड़ी पर तड़के 3 बजे से श्रद्धालुओं की भारी भीड़
धार्मिक नगरी Haridwar में गंगा दशहरा के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सोमवार तड़के सुबह 3 बजे से ही श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए हरकी पैड़ी पहुंचने लगे। सुबह 5 बजे से 8 बजे तक हालात ऐसे रहे कि Har Ki Pauri पर पैर रखने तक की जगह नहीं बची। हर ओर “हर-हर गंगे” और “गंगा मैया की जय” के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया।मान्यता है कि गंगा दशहरा के दिन मां गंगा में स्नान करने से व्यक्ति के 10 प्रकार के पापों का नाश हो जाता है। इनमें 4 शारीरिक, 3 मानसिक और 3 वाणी से जुड़े दोष शामिल बताए गए हैं। इसी आस्था के चलते देशभर से लाखों श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचे और गंगा में आस्था की डुबकी लगाई।
हरिद्वार के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य Manoj Tripathi ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गंगा दशहरा के दिन मौन रहकर गंगा स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से मन, शरीर और वाणी से जुड़े दोषों का शमन होता है तथा व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है।पंडित मनोज त्रिपाठी के मुताबिक धार्मिक ग्रंथों और शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि इसी दिन मां गंगा का स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। राजा भगीरथ की कठोर तपस्या के बाद मां गंगा पृथ्वी पर आईं और उनके पूर्वजों का उद्धार किया। तभी से गंगा दशहरा का पर्व विशेष श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है।
गंगा स्नान के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिला। कई लोगों ने परिवार के साथ पूजा-अर्चना की, जबकि साधु-संतों और अखाड़ों के संतों ने भी विशेष अनुष्ठान किए। घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस, एनडीआरएफ और प्रशासनिक टीमों को तैनात किया गया ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो।भीषण गर्मी के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं दिखी। सुबह होते-होते हरकी पैड़ी और आसपास के घाट पूरी तरह श्रद्धालुओं से भर गए। प्रशासन के अनुसार दिनभर लाखों श्रद्धालुओं के हरिद्वार पहुंचने की संभावना है।
गंगा दशहरा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा का प्रतीक भी माना जाता है। इस दिन मां गंगा की पूजा और स्नान को मोक्षदायी माना गया है। हरिद्वार में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने एक बार फिर साबित कर दिया कि गंगा के प्रति लोगों की आस्था आज भी उतनी ही गहरी और अटूट है।