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NFHS-6 रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता: राजस्थान में किशोर गर्भावस्था बढ़ी, टीकाकरण और बच्चों के पोषण में गिरावट

 

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) की रिपोर्ट ने राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था और सामाजिक विकास से जुड़े कई चिंताजनक संकेत दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में किशोर गर्भावस्था दर में बढ़ोतरी हुई है, जबकि संस्थागत प्रसव, बच्चों के पोषण स्तर और टीकाकरण कवरेज में गिरावट दर्ज की गई है।

किशोर गर्भावस्था के मामलों में वृद्धि

रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में कम उम्र में गर्भधारण के मामलों में इजाफा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि किशोर गर्भावस्था न केवल मातृ स्वास्थ्य बल्कि नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है। यह स्थिति जागरूकता और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को लेकर भी सवाल खड़े करती है।

संस्थागत प्रसव में आई कमी

NFHS-6 के आंकड़ों में संस्थागत प्रसव यानी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्रों में होने वाली डिलीवरी के प्रतिशत में गिरावट दर्ज की गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सुरक्षित मातृत्व के लिए संस्थागत प्रसव बेहद जरूरी माना जाता है।

बच्चों के पोषण स्तर में गिरावट

रिपोर्ट में बच्चों के पोषण से जुड़े संकेतक भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। कुपोषण, कम वजन और विकास संबंधी समस्याओं से जुड़े आंकड़ों में गिरावट की बजाय प्रतिकूल रुझान देखने को मिला है। इससे बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर असर पड़ सकता है।

टीकाकरण कवरेज में बड़ी गिरावट

राज्य में पूर्ण टीकाकरण प्राप्त करने वाले बच्चों की संख्या में भी कमी दर्ज की गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि टीकाकरण में गिरावट भविष्य में कई संक्रामक बीमारियों के खतरे को बढ़ा सकती है।

स्वास्थ्य विभाग के सामने बड़ी चुनौती

रिपोर्ट के निष्कर्षों ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण और टीकाकरण कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान जरूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने, किशोरियों में जागरूकता फैलाने और पोषण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष फोकस करने की जरूरत है।

नीतिगत सुधार की मांग

रिपोर्ट सामने आने के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े जानकारों ने सरकार से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों की समीक्षा करने और कमजोर संकेतकों में सुधार के लिए विशेष रणनीति तैयार करने की मांग की है।

NFHS-6 की रिपोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राजस्थान को स्वास्थ्य और पोषण के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अभी लंबा सफर तय करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते प्रभावी कदम उठाए गए तो इन चुनौतियों से निपटा जा सकता है।