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5 साल बाद फिर खुलेगा लिपुलेख व्यापार मार्ग, वीडियो में जाने अब घोड़ों नहीं गाड़ियों से पहुंचेगा सामान

 

भारत और चीन के बीच वर्ष 2020 में हुए गलवान संघर्ष के बाद बंद हुआ ऐतिहासिक लिपुलेख व्यापार मार्ग अब एक बार फिर खुलने जा रहा है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से करीब 300 व्यापारियों की सूची विदेश मंत्रालय को भेजी गई है। इस फैसले के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में उत्साह का माहौल है और सदियों पुराना भारत-तिब्बत व्यापार फिर से रफ्तार पकड़ने की तैयारी में है।खास बात यह है कि इस बार व्यापार का तरीका पूरी तरह बदलने जा रहा है। पहले जहां व्यापारी घोड़े, खच्चरों और पैदल रास्तों के जरिए सामान ले जाते थे, वहीं अब सीमा तक सड़क पहुंचने के कारण मालवाहक वाहन सीधे सीमा तक पहुंच सकेंगे। इससे व्यापार तेज होने के साथ-साथ स्थानीय कारोबारियों को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।

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जानकारी के मुताबिक व्यापारी बिना वीजा और पासपोर्ट के विशेष ट्रेड पास के जरिए तिब्बत के तकलाकोट बाजार तक जा सकेंगे। यह बाजार लंबे समय से भारत-तिब्बत व्यापार का प्रमुख केंद्र रहा है। सीमावर्ती इलाकों के व्यापारी यहां से पारंपरिक वस्तुओं का आदान-प्रदान करते रहे हैं।लिपुलेख व्यापार मार्ग सिर्फ आर्थिक गतिविधियों का रास्ता नहीं रहा, बल्कि यह हिमालयी सभ्यताओं और सांस्कृतिक रिश्तों का भी प्रतीक माना जाता है। इतिहास गवाह है कि तिब्बती व्यापारी याक और भेड़ों के लंबे काफिलों के साथ नमक, ऊन और बोरेक्स लेकर भारत आते थे। बदले में भारतीय व्यापारी कपड़ा, मसाले, अनाज और दैनिक जरूरत का सामान तिब्बत ले जाते थे।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यापार मार्ग के दोबारा खुलने से सीमावर्ती गांवों की अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिलेगी। लंबे समय से बंद पड़े इस मार्ग के कारण स्थानीय व्यापारियों और लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था। अब व्यापार शुरू होने से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और सीमा क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी।सरकार द्वारा सड़क और बुनियादी ढांचे के विकास के बाद अब यह मार्ग पहले से ज्यादा आधुनिक और सुविधाजनक हो गया है। पहले जहां ऊंचे पहाड़ी रास्तों और खराब मौसम के कारण व्यापार बेहद कठिन माना जाता था, वहीं अब वाहन पहुंचने से समय और लागत दोनों में कमी आएगी।

गलवान संघर्ष के बाद भारत और चीन के रिश्तों में आई तल्खी का असर सीमावर्ती व्यापार पर भी पड़ा था। ऐसे में इस मार्ग को फिर से खोलने को दोनों देशों के बीच सामान्य स्थिति बहाल होने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यह सिर्फ व्यापार की वापसी नहीं, बल्कि पुरानी सांस्कृतिक विरासत और रिश्तों के पुनर्जीवित होने जैसा है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले समय में यह ऐतिहासिक व्यापार मार्ग सीमावर्ती क्षेत्रों की तस्वीर किस तरह बदलता है।