उत्तराखंड में नाइजीरियन गैंग का ‘इश्क स्कैम’ बेनकाब, अमीरों से दोस्ती और महंगे गिफ्ट का झांसा देकर महिलाओं से लाखों की ठगी
उत्तराखंड में साइबर ठगी का एक नया मामला सामने आया है। यहां कथित नाइजीरियन गैंग महिलाओं को प्रेम जाल में फंसाकर लाखों रुपये की ठगी कर रहा है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी सोशल मीडिया के जरिए महिलाओं से दोस्ती करते हैं। इसके बाद खुद को अमीर और विदेशी नागरिक बताकर महंगे गिफ्ट भेजने का झांसा देते हैं। फिर गिफ्ट कस्टम में फंसने या उसे छुड़ाने के नाम पर महिलाओं से पैसे ऐंठ लेते हैं। इस तरह की ठगी को ‘इश्क स्कैम’ या रोमांस स्कैम कहा जाता है।
सोशल मीडिया पर दोस्ती कर जीतते हैं भरोसा
पुलिस के अनुसार, ठगी करने वाले गिरोह के सदस्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर महिलाओं को निशाना बनाते हैं। वे खुद को विदेशी कारोबारी, डॉक्टर या किसी प्रतिष्ठित पेशे से जुड़ा व्यक्ति बताते हैं। बातचीत के दौरान महिलाओं का भरोसा जीतने के लिए महंगी जीवनशैली और आर्थिक संपन्नता का दिखावा किया जाता है।
धीरे-धीरे आरोपी दोस्ती को प्रेम संबंध में बदलने की कोशिश करते हैं। इसके बाद महिलाओं को महंगे गिफ्ट, मोबाइल, ज्वेलरी और अन्य कीमती सामान भेजने की बात कहते हैं।
कस्टम ड्यूटी के नाम पर मांगते हैं पैसे
कुछ समय बाद महिला को फोन या मैसेज के जरिए बताया जाता है कि विदेश से भेजा गया गिफ्ट एयरपोर्ट या कस्टम विभाग में रोक लिया गया है। उसे छुड़ाने के लिए कस्टम ड्यूटी, टैक्स या अन्य शुल्क जमा कराने की बात कही जाती है।
आरोपी अलग-अलग बहाने बनाकर बैंक खाते में रकम जमा करवाते हैं। कई बार एक बार पैसा मिलने के बाद नए शुल्क का बहाना बनाकर दोबारा रकम मांगी जाती है। जब महिला को ठगी का एहसास होता है, तब तक आरोपी संपर्क तोड़ चुके होते हैं।
पुलिस ने महिलाओं को किया सतर्क
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से दोस्ती करते समय सावधानी बरतें। किसी विदेशी व्यक्ति या ऑनलाइन दोस्त के महंगे गिफ्ट भेजने के दावे पर तुरंत भरोसा न करें। कस्टम ड्यूटी या पार्सल छुड़ाने के नाम पर किसी अनजान खाते में पैसे जमा न करें।
पुलिस के मुताबिक, ऑनलाइन दोस्ती के बाद अचानक पैसों की मांग होना साइबर ठगी का संकेत हो सकता है। ऐसे मामलों में पीड़ितों को तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करनी चाहिए और साइबर क्राइम पोर्टल पर भी रिपोर्ट दर्ज करानी चाहिए।
इस तरह के मामलों में सबसे जरूरी है कि ऑनलाइन पहचान की पुष्टि किए बिना किसी को निजी जानकारी, बैंक डिटेल या पैसे न दिए जाएं।