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हरिद्वार में पीएम पोषण योजना पर सवाल: 131 मदरसों की जांच में अनियमितताएं उजागर, 23 संदेह के घेरे में

 

उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में पीएम पोषण योजना (पूर्व में मिड-डे मील योजना) को लेकर बड़ी प्रशासनिक जांच सामने आई है। जिले में संचालित मदरसों में इस योजना के क्रियान्वयन की प्रारंभिक जांच में कई अनियमितताओं का खुलासा हुआ है, जिससे शिक्षा और पोषण व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

प्रशासन द्वारा की गई जांच में कुल 131 मदरसों का निरीक्षण किया गया। इस दौरान 23 मदरसे संदेह के घेरे में पाए गए हैं, जहां योजना के संचालन में गड़बड़ी की आशंका जताई गई है। वहीं 11 मदरसों में पीएम पोषण योजना पूरी तरह बंद मिली, जिससे वहां पढ़ने वाले बच्चों के पोषण पर सीधा असर पड़ने की बात सामने आई है।

अधिकारियों के अनुसार, कई जगहों पर रजिस्टर और वास्तविक उपस्थिति में अंतर पाया गया है। कुछ संस्थानों में भोजन वितरण रिकॉर्ड अधूरे मिले, जबकि कुछ स्थानों पर योजना के तहत मिलने वाली सुविधाओं का सही तरीके से उपयोग नहीं किया जा रहा था। यह भी जांच का विषय है कि निर्धारित मानकों का पालन क्यों नहीं किया गया।

जांच टीम ने बताया कि पीएम पोषण योजना का उद्देश्य स्कूलों और शिक्षा संस्थानों में पढ़ने वाले बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है, ताकि उनकी उपस्थिति और स्वास्थ्य में सुधार हो सके। लेकिन प्रारंभिक रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों से संकेत मिलता है कि कई जगह यह योजना प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो पा रही है।

जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आगे की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। संबंधित मदरसों से दस्तावेज, रजिस्टर और अन्य रिकॉर्ड मांगे गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जिन संस्थानों में अनियमितताएं पाई जाएंगी, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जांच का उद्देश्य किसी संस्था को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक रूप से बच्चों तक पहुंचे। उन्होंने यह भी कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने के लिए नियमित निरीक्षण आगे भी जारी रहेंगे।

स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। कुछ लोगों का कहना है कि ऐसी योजनाओं की सख्त निगरानी जरूरी है, ताकि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या लापरवाही न हो सके। वहीं शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के पोषण से जुड़ी योजनाओं में किसी भी तरह की गड़बड़ी गंभीर चिंता का विषय है।

फिलहाल जांच जारी है और प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इस पूरे मामले ने एक बार फिर सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।