60 साल की राजनीति में पहली बार जवाब मांगा गया, दिल्ली पहुंचे हरीश रावत; हाईकमान से नहीं हो सकी मुलाकात
उत्तराखंड कांग्रेस में चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत बुधवार को पार्टी हाईकमान के बुलावे पर दिल्ली पहुंचे। उन्हें अपनी ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ को लेकर पार्टी नेतृत्व के सामने स्पष्टीकरण देना था। हालांकि दिल्ली पहुंचने के बाद भी उनकी हाईकमान से मुलाकात नहीं हो सकी। इस बीच रावत ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने मन की बात साझा की और कहा कि करीब 60 साल के राजनीतिक जीवन में पहली बार उनसे जवाब मांगा जा रहा है।
‘60 साल में कभी जवाब तलब नहीं हुआ’
हरीश रावत ने कहा कि कांग्रेस से उनके लंबे जुड़ाव के दौरान उनसे कई गलतियां हुई होंगी, लेकिन पार्टी ने कभी उनसे जवाब-तलब नहीं किया। उन्होंने बताया कि कभी कोई बात होती भी थी तो पार्टी के लोग उनसे पूछ लेते थे कि आखिर मामला क्या है और उनके जवाब को एक कार्यकर्ता के बयान के तौर पर स्वीकार कर लिया जाता था।
रावत के मुताबिक, इस बार सोशल मीडिया के जरिए उन्हें पता चला कि उनसे जवाब या स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है। इसके बाद उन्होंने खुद भी पार्टी नेतृत्व से मिलने का समय मांगा। उन्होंने इसे अपने राजनीतिक जीवन की एक तरह से अधूरी कमी पूरी होने जैसा बताया।
जनसंवाद यात्रा को लेकर बढ़ा विवाद
हरीश रावत की ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ को लेकर कांग्रेस हाईकमान ने आपत्ति जताई थी। पार्टी नेतृत्व की ओर से व्यक्तिगत तौर पर इस तरह के कार्यक्रम नहीं करने और सामूहिक कार्यक्रमों पर जोर देने की बात सामने आई थी। इसके बावजूद रावत ने यात्रा शुरू कर दी थी।
पार्टी की नाराजगी के बाद उन्हें दिल्ली बुलाया गया। कांग्रेस नेतृत्व की ओर से उनकी यात्रा को लेकर स्पष्टीकरण मांगे जाने की बात सामने आई थी। रावत ने भी कहा था कि उनका मकसद पार्टी को मजबूत करना और जनता के बीच संवाद बढ़ाना है।
दिल्ली पहुंचे, लेकिन मुलाकात नहीं हुई
हाईकमान के बुलावे पर रावत दिल्ली तो पहुंचे, लेकिन उनकी पार्टी नेतृत्व से मुलाकात नहीं हो सकी। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर है कि कांग्रेस नेतृत्व इस पूरे मामले पर आगे क्या फैसला करता है।
उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रावत लंबे समय से प्रदेश की राजनीति में सक्रिय हैं और उनकी जनसंवाद यात्रा को लेकर पार्टी के भीतर अलग-अलग राय सामने आई है। पार्टी नेतृत्व जहां संगठनात्मक अनुशासन और सामूहिक कार्यक्रमों पर जोर दे रहा है, वहीं रावत लगातार जनता के बीच सक्रिय रहने की बात कहते रहे हैं।
अब रावत के स्पष्टीकरण और कांग्रेस हाईकमान के अगले कदम से उत्तराखंड कांग्रेस की आगे की रणनीति को लेकर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।