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अमेरिका में इंश्योरेंस के 10 करोड़ पाने रची फर्जी मौत, श्मशानघाट की रसीद भी लगाई; एक गलती ने पकड़ाया
 

 

इंश्योरेंस की बड़ी रकम हासिल करने के लिए मौत का नाटक रचने और फर्जी दस्तावेज तैयार कराने का मामला सामने आया है। इस तरह के मामलों में श्मशान घाट की रसीद और डेथ सर्टिफिकेट जैसे दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन दस्तावेजों में छोटी-सी गड़बड़ी भी पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश कर सकती है।

10 करोड़ के इंश्योरेंस के लिए रची फर्जी मौत की साजिश, श्मशान की रसीद भी लगाई; एक गलती से खुला राज

10 करोड़ रुपये का इंश्योरेंस क्लेम हासिल करने के लिए एक व्यक्ति की फर्जी मौत का मामला सामने आया था। इस साजिश में फर्जी डेथ सर्टिफिकेट और श्मशान घाट की रसीद तक तैयार कराई गई। लेकिन दस्तावेजों में एक ऐसी गड़बड़ी रह गई, जिसने पूरे मामले का पर्दाफाश कर दिया। यह मामला अमेरिका का नहीं, बल्कि हरियाणा के गुरुग्राम का है। घटना की जानकारी जून 2021 में सामने आई थी।

पत्नी के नाम से किया गया था 10 करोड़ का क्लेम

मामला गुरुग्राम के एक निजी विश्वविद्यालय के मालिक से जुड़ा था। उनकी कथित मौत के आधार पर पत्नी के नाम से 10 करोड़ रुपये के जीवन बीमा का क्लेम किया गया। बीमा कंपनी के अधिकारियों को जब क्लेम मिला तो उन्होंने दस्तावेजों की जांच शुरू की। इसके बाद कंपनी की एक टीम मालिक की मौत की पुष्टि करने के लिए उनके साउथ सिटी-1 स्थित घर पहुंची।

वहां पहुंचने पर अधिकारियों को पता चला कि जिस व्यक्ति को कागजों में मृत बताया गया है, वह वास्तव में जीवित है। इसके बाद बीमा कंपनी ने पुलिस को मामले की जानकारी दी।

डेथ सर्टिफिकेट में मिली बड़ी गड़बड़ी

पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया कि क्लेम के साथ लगाया गया डेथ सर्टिफिकेट नगर निगम की ओर से जारी नहीं किया गया था। दस्तावेज पर मौजूद क्यूआर कोड और सीरियल नंबर की जांच की गई तो उसमें किसी दूसरे व्यक्ति का नाम और पता सामने आया।

जांच अधिकारियों के मुताबिक, ऐसा लग रहा था कि पहले से जारी किसी वास्तविक मृत्यु प्रमाणपत्र में नाम, उम्र और पता बदलकर नया दस्तावेज तैयार किया गया था। प्रमाणपत्र पर क्यूआर कोड, सीरियल नंबर और मुहर तो एक जैसे थे, लेकिन उसे स्कैन करने पर मूल व्यक्ति की जानकारी सामने आ रही थी। इसी गड़बड़ी ने फर्जीवाड़े का शक पुख्ता किया।

श्मशान की रसीद भी फर्जी होने का शक

बीमा क्लेम के साथ श्मशान घाट की रसीद भी जमा कराई गई थी। पुलिस को इस रसीद के भी फर्जी या छेड़छाड़ किए जाने का संदेह था। जांच में यह भी आशंका जताई गई कि जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र से जुड़े सरकारी पोर्टल के लॉगइन विवरण का गलत इस्तेमाल कर दस्तावेजों में बदलाव किया गया।

पुलिस ने इस मामले को केवल बीमा धोखाधड़ी तक सीमित नहीं माना, बल्कि सरकारी दस्तावेजों में कथित छेड़छाड़ और पोर्टल की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की भी जांच शुरू की थी। अधिकारियों ने ऐसे अन्य मामलों की भी पड़ताल की, जिनमें फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किया गया था।

यह मामला बताता है कि बीमा क्लेम में जमा किए जाने वाले दस्तावेजों की जांच कितनी अहम होती है। एक क्यूआर कोड की गड़बड़ी ने 10 करोड़ रुपये के कथित बीमा फर्जीवाड़े की साजिश सामने ला दी।