रुड़की में कुत्ते का आतंक! एक ने 40 को काट किया घायल; गलियों में पसरा सन्नाटा
उत्तराखंड के रुड़की क्षेत्र में एक आक्रामक कुत्ते ने ऐसा आतंक मचाया कि गांव के लोग घरों में कैद होने को मजबूर हो गए। हरिद्वार जिले के भगवानपुर क्षेत्र के सरठेड़ी गांव में गुरुवार को एक कुत्ते ने बच्चों समेत करीब 40 लोगों को काटकर घायल कर दिया। अचानक हुए हमलों से गांव में अफरा-तफरी मच गई। लोगों ने अपने घरों के दरवाजे बंद कर लिए और गलियों में सन्नाटा छा गया।
बच्चों और राहगीरों को बनाया निशाना
जानकारी के मुताबिक, सरठेड़ी गांव में सुबह कुत्ते ने अचानक राह चलते लोगों पर हमला करना शुरू कर दिया। रास्ते से गुजर रहे लोग उसकी चपेट में आते गए। कुत्ते ने बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को काटकर घायल कर दिया। लगातार हो रहे हमलों से ग्रामीणों में दहशत फैल गई।
हालात ऐसे हो गए कि लोग घरों से बाहर निकलने में भी डरने लगे। कुत्ते के हमले से बचने के लिए कई लोगों ने अपने घरों के दरवाजे बंद कर लिए। गांव में हर तरफ डर का माहौल बन गया।
12 घायलों को रुड़की अस्पताल पहुंचाया
घटना के बाद घायलों को उपचार के लिए अलग-अलग अस्पतालों में ले जाया गया। रुड़की सिविल अस्पताल में 12 घायलों को भर्ती कराया गया, जिनमें चार बच्चे भी शामिल थे। अन्य घायलों का उपचार भगवानपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और निजी अस्पतालों में कराया गया।
सिविल अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एके मिश्रा के मुताबिक, घायलों को एंटी रेबीज वैक्सीन और एंटी रेबीज सीरम दिया गया। तीन लोगों के घाव गंभीर होने के कारण टांके भी लगाने पड़े।
ग्रामीणों ने हमलावर कुत्ते को मार दिया
लगातार लोगों पर हमला कर रहे कुत्ते को लेकर ग्रामीणों में भय और नाराजगी बढ़ गई। रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीणों ने मिलकर हमलावर कुत्ते को मार दिया। इसके बाद लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन घटना से गांव में दहशत का माहौल बना रहा।
कुत्ता काटने पर तुरंत कराएं इलाज
कुत्ते के काटने की घटना को गंभीरता से लेना जरूरी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक धोना चाहिए और जल्द से जल्द अस्पताल जाकर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। डॉक्टर की सलाह के अनुसार एंटी रेबीज वैक्सीन और जरूरत पड़ने पर अन्य उपचार लेना जरूरी है।
सरठेड़ी गांव की इस घटना ने एक बार फिर आवारा और आक्रामक कुत्तों से लोगों की सुरक्षा का मुद्दा सामने ला दिया है। ग्रामीणों के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चिंता बच्चों और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।