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दिनेश आर्य को राज्यसभा टिकट, धामी की पसंद पर फिर हाईकमान की मुहर; जानिए पूरा कनेक्शन

 

उत्तराखंड की राजनीति में भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के लिए दिनेश आर्य को प्रत्याशी बनाकर बड़ा फैसला लिया है। आर्य का नाम सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, दिनेश आर्य लंबे समय तक मुख्यमंत्री धामी के जनसंपर्क अधिकारी के तौर पर काम कर चुके हैं। इसके बाद भी उन्होंने संगठन में अपनी सक्रियता जारी रखी और अब भाजपा ने उन्हें राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है।

दिनेश आर्य को प्रत्याशी बनाए जाने को कुछ राजनीतिक विश्लेषक मुख्यमंत्री धामी के प्रभाव और पार्टी नेतृत्व के बीच उनके समन्वय से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, भाजपा की ओर से आधिकारिक तौर पर यह नहीं कहा गया है कि आर्य का चयन केवल मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत पसंद के आधार पर हुआ है। केंद्रीय चुनाव समिति ने उनके नाम पर अंतिम मुहर लगाई है।

धामी के जनसंपर्क अधिकारी रह चुके हैं आर्य

दिनेश आर्य लंबे समय से भाजपा संगठन से जुड़े रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने 2021 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के जनसंपर्क अधिकारी के रूप में भी काम किया था। इसके अलावा वह भाजपा के नैनीताल जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं और पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चे में राष्ट्रीय स्तर पर भी काम कर चुके हैं। वर्तमान में वह उत्तराखंड सरकार में राज्य मंत्री स्तर का दर्जा प्राप्त पद पर हैं।

आर्य का राजनीतिक सफर संगठन के स्तर से शुरू हुआ। उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और भाजपा से जुड़े संगठनात्मक कामों में लंबे समय तक भूमिका निभाई। वह नैनीताल क्षेत्र से विधानसभा चुनाव का टिकट पाने के लिए भी दावेदारी कर चुके हैं, लेकिन उस समय उन्हें टिकट नहीं मिला। अब पार्टी ने उन्हें राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाकर राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी जिम्मेदारी का अवसर दिया है।

धामी की पसंद पर पहले भी लगी मुहर

दिनेश आर्य की उम्मीदवारी के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या भाजपा हाईकमान ने एक बार फिर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पसंद को प्राथमिकता दी है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इससे पहले भी सरकार और संगठन से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों में धामी की राय को महत्व मिला है। इनमें मंत्रिमंडल विस्तार, संगठनात्मक नियुक्तियां और राज्यसभा उम्मीदवार के चयन जैसे फैसलों का उल्लेख किया जा रहा है।

राज्यसभा उम्मीदवार के चयन के लिए भाजपा के भीतर कई नामों पर चर्चा हुई थी। प्रदेश स्तर पर विचार-विमर्श के बाद करीब 15 नामों का पैनल केंद्रीय नेतृत्व को भेजे जाने की जानकारी सामने आई थी। इन नामों में से दिनेश आर्य को अंतिम रूप दिया गया।

विधानसभा चुनाव से पहले महत्वपूर्ण चयन

दिनेश आर्य के चयन का समय भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा के इस फैसले के सामाजिक और क्षेत्रीय संदेश पर भी चर्चा हो रही है। आर्य कुमाऊं क्षेत्र से आते हैं और अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित हैं। ऐसे में उनके चयन को सामाजिक प्रतिनिधित्व के नजरिए से भी देखा जा रहा है।

उत्तराखंड की एकमात्र खाली हो रही राज्यसभा सीट के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होना है। मौजूदा सांसद नरेश बंसल का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त होगा। अब दिनेश आर्य की उम्मीदवारी के बाद चुनावी प्रक्रिया के साथ-साथ भाजपा में मुख्यमंत्री धामी की भूमिका को लेकर भी राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।