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देहरादून पैनेसिया अस्पताल अग्निकांड: 1 मरीज की मौत, 4 गंभीर, नियम उल्लंघन पर 3 अस्पताल बंद

 

देहरादून में हुए पैनेसिया अस्पताल अग्निकांड के बाद स्थिति गंभीर बनी हुई है। इस दर्दनाक घटना में अब तक एक मरीज की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि चार अन्य मरीजों की हालत नाजुक बताई जा रही है। सभी घायलों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में जारी है और डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है।

जानकारी के अनुसार, आग लगने की घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई थी। स्टाफ और स्थानीय लोगों की मदद से मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास किया गया, लेकिन इस दौरान एक मरीज को नहीं बचाया जा सका। अन्य गंभीर मरीजों को तुरंत उच्च चिकित्सा सुविधा वाले अस्पतालों में रेफर किया गया।

घटना के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में कई अस्पतालों में सुरक्षा और फायर सेफ्टी मानकों की अनदेखी सामने आने की बात कही जा रही है। इसी आधार पर प्रशासन ने कड़ा कदम उठाते हुए तीन अस्पतालों को तत्काल प्रभाव से बंद करा दिया है।

अधिकारियों का कहना है कि इन अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा उपकरणों की कमी, मानकों का पालन न होना और आपातकालीन निकासी व्यवस्था में गंभीर खामियां पाई गई हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मरीजों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और अग्निशमन विभाग की संयुक्त टीम सभी निजी और सरकारी अस्पतालों की जांच में जुट गई है। शहर के अन्य अस्पतालों में भी फायर सेफ्टी ऑडिट शुरू कर दिया गया है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर आक्रोश और चिंता दोनों देखने को मिल रहे हैं। लोगों का कहना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही बेहद गंभीर मामला है और इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में फायर सेफ्टी सिस्टम का नियमित निरीक्षण और आपातकालीन अभ्यास बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी दुर्घटना की स्थिति में जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके।

फिलहाल प्रशासन ने मामले की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं और दोषियों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। घायलों के इलाज को प्राथमिकता देते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

यह घटना एक बार फिर अस्पतालों में सुरक्षा मानकों की गंभीरता पर सवाल खड़े कर रही है और प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चेतावनी के रूप में सामने आई है।