दिल्ली में इंडिया ब्लॉक की महारैली पर CM धामी का हमला, बोले- विपक्ष नेपाल और बांग्लादेश जैसे हालात पैदा करना चाहता है
दिल्ली के रामलीला मैदान में इंडिया ब्लॉक की ओर से आयोजित 'वोट बचाओ, देश बचाओ' महारैली को लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विपक्ष पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के विरोध के नाम पर देश में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहा है। धामी ने कहा कि विपक्ष नेपाल और बांग्लादेश जैसी स्थिति पैदा करना चाहता है और सत्ता परिवर्तन की बात कर रहा है।
दीवाली के दौरान रैली करने पर भी उठाए सवाल
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि जब देश में दीपावली का त्योहार मनाया जा रहा है, तब विपक्ष को प्रदर्शन करने के बजाय त्योहार के बाद अपनी बात रखनी चाहिए थी। उनके मुताबिक, व्यापारी वर्ग ने भी राहुल गांधी और इंडिया ब्लॉक के नेताओं से अपील की थी कि वे त्योहारों के बाद विरोध प्रदर्शन करें, ताकि कारोबार प्रभावित न हो और आम लोगों को परेशानी न उठानी पड़े।धामी ने आरोप लगाया कि विपक्ष जानबूझकर अव्यवस्था फैलाना चाहता है। उन्होंने फ्रांस और यूरोप के कुछ देशों में हुए हिंसक प्रदर्शनों का भी जिक्र किया।
इमरजेंसी और चुनी हुई सरकारों का किया जिक्र
सीएम धामी ने कांग्रेस के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी ने देश में आपातकाल लगाया था और अलग-अलग समय पर चुनी हुई सरकारों को बर्खास्त किया। उन्होंने कहा कि अब सत्ता से बाहर होने और जनता का भरोसा कम होने के कारण विपक्ष हताशा और निराशा में ऐसे कदम उठा रहा है।धामी ने अपने बयान में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के शब्दों का भी उल्लेख किया और कांग्रेस पर निशाना साधा।
क्यों आयोजित की गई थी महारैली?
इंडिया ब्लॉक ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में यह महारैली मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के विरोध में आयोजित की थी। विपक्षी दलों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर सवाल उठाए और इसे 'वोट चोरी' से जोड़कर आरोप लगाए।
रैली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अन्य विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। विपक्ष ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा की मांग उठाई।वहीं, चुनाव आयोग और सरकार की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण को पात्र मतदाताओं की पहचान और डुप्लीकेट या अपात्र नामों को हटाने की प्रक्रिया बताया गया है। इस मुद्दे पर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच मतभेद बने हुए हैं।
दिल्ली के रामलीला मैदान में इंडिया ब्लॉक की ओर से आयोजित 'वोट बचाओ, देश बचाओ' महारैली को लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विपक्ष पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के विरोध के नाम पर देश में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहा है। धामी ने कहा कि विपक्ष नेपाल और बांग्लादेश जैसी स्थिति पैदा करना चाहता है और सत्ता परिवर्तन की बात कर रहा है।
दीवाली के दौरान रैली करने पर भी उठाए सवाल
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि जब देश में दीपावली का त्योहार मनाया जा रहा है, तब विपक्ष को प्रदर्शन करने के बजाय त्योहार के बाद अपनी बात रखनी चाहिए थी। उनके मुताबिक, व्यापारी वर्ग ने भी राहुल गांधी और इंडिया ब्लॉक के नेताओं से अपील की थी कि वे त्योहारों के बाद विरोध प्रदर्शन करें, ताकि कारोबार प्रभावित न हो और आम लोगों को परेशानी न उठानी पड़े।धामी ने आरोप लगाया कि विपक्ष जानबूझकर अव्यवस्था फैलाना चाहता है। उन्होंने फ्रांस और यूरोप के कुछ देशों में हुए हिंसक प्रदर्शनों का भी जिक्र किया।
इमरजेंसी और चुनी हुई सरकारों का किया जिक्र
सीएम धामी ने कांग्रेस के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी ने देश में आपातकाल लगाया था और अलग-अलग समय पर चुनी हुई सरकारों को बर्खास्त किया। उन्होंने कहा कि अब सत्ता से बाहर होने और जनता का भरोसा कम होने के कारण विपक्ष हताशा और निराशा में ऐसे कदम उठा रहा है।धामी ने अपने बयान में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के शब्दों का भी उल्लेख किया और कांग्रेस पर निशाना साधा।
क्यों आयोजित की गई थी महारैली?
इंडिया ब्लॉक ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में यह महारैली मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के विरोध में आयोजित की थी। विपक्षी दलों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर सवाल उठाए और इसे 'वोट चोरी' से जोड़कर आरोप लगाए।रैली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अन्य विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। विपक्ष ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा की मांग उठाई।वहीं, चुनाव आयोग और सरकार की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण को पात्र मतदाताओं की पहचान और डुप्लीकेट या अपात्र नामों को हटाने की प्रक्रिया बताया गया है। इस मुद्दे पर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच मतभेद बने हुए हैं।