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उत्तराखंड में चारधाम यात्रा का शुभारंभ, वीडियो में देंखे गंगोत्री-यमुनोत्री के कपाट खुले, श्रद्धालुओं में उत्साह

 

उत्तराखंड में बहुप्रतीक्षित चारधाम यात्रा का आज विधिवत शुभारंभ हो गया। अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए, जिसके साथ ही देशभर से आए भक्तों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है।आज दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर गंगोत्री धाम के कपाट खोले गए, जबकि 12 बजकर 35 मिनट पर यमुनोत्री धाम के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलने के साथ ही दोनों धामों में वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच पूजा-अर्चना संपन्न हुई।

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गंगोत्री धाम में इस वर्ष की पहली पूजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से की गई। इस विशेष पूजा में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी शामिल हुए। पूजा संपन्न होने के बाद आम श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के द्वार खोल दिए गए, जिसके बाद भक्तों ने मां गंगा के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।वहीं, यमुनोत्री धाम में भी कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें मंदिर की ओर बढ़ती नजर आईं। सुबह से ही बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए इंतजार कर रहे थे, जिन्हें कपाट खुलने के बाद दर्शन का अवसर मिला। प्रशासन की ओर से भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।

चारधाम यात्रा के अगले पड़ाव के रूप में बाबा केदारनाथ की डोली भी अपने शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर से फाटा के लिए रवाना हो गई है। पंचमुखी डोली की यात्रा पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ निकाली जा रही है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार, बाबा केदारनाथ की डोली 21 अप्रैल को केदारनाथ धाम पहुंचेगी। इसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ मंदिर के कपाट विधिवत रूप से खोले जाएंगे। इसके साथ ही चारधाम यात्रा अपने पूर्ण रूप में शुरू हो जाएगी, जिसमें बद्रीनाथ धाम के कपाट भी जल्द ही खोले जाने हैं।

चारधाम यात्रा को लेकर राज्य सरकार और प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं। यात्रियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। इस बार भी लाखों श्रद्धालुओं के चारधाम यात्रा में शामिल होने की उम्मीद है। हर साल की तरह इस बार भी चारधाम यात्रा आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक बनकर सामने आई है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह यह दर्शाता है कि यह यात्रा उनके लिए कितनी महत्वपूर्ण है।