तलवार से काटकर भाई-भाभी और मां की कर दी थी हत्या, फांसी की सजा निरस्त; रिहा करेगी सरकार
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने टिहरी गढ़वाल में मां, बड़े भाई और गर्भवती भाभी की तलवार से हत्या करने के दोषी संजय सिंह की फांसी की सजा रद्द कर दी है। कोर्ट ने राज्य सरकार को दोषी का मानसिक उपचार कराने और ठीक होने के बाद उसे रिहा करने का निर्देश दिया है। इस मामले में आरोपी को निचली अदालत ने अगस्त 2021 में मृत्युदंड की सजा सुनाई थी।
2014 में हुई थी तीन लोगों की हत्या
मामला टिहरी गढ़वाल जिले के गुमाल गांव का है। रिपोर्ट के मुताबिक, 13 दिसंबर 2014 को संजय सिंह ने मामूली विवाद के बाद अपनी मां, बड़े भाई और गर्भवती भाभी की तलवार से हत्या कर दी थी। घटना के बाद उसके पिता राम सिंह पवार ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
मामले की सुनवाई के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने अगस्त 2021 में संजय सिंह को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। इसके बाद आरोपी ने हाईकोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी।
मानसिक बीमारी बनी अहम आधार
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपी की मानसिक स्थिति का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। आरोपी की ओर से पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद वशिष्ठ ने दलील दी कि घटना के समय उसकी मानसिक स्थिति की उचित जांच नहीं की गई थी। उन्होंने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि आरोपी मानसिक रूप से बीमार है और उसे उपचार की जरूरत है।
रिपोर्ट के अनुसार, मेडिकल बोर्ड ने भी आरोपी को मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया था। यह बात भी सामने आई कि उपचार के बाद उसकी स्थिति में सुधार संभव है। बचाव पक्ष का कहना था कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े इन तथ्यों पर पर्याप्त विचार किए बिना मृत्युदंड की सजा बरकरार रखी गई।
हाईकोर्ट ने क्यों रद्द की फांसी की सजा?
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ शाह की खंडपीठ ने की। हाईकोर्ट ने आरोपी की मानसिक स्थिति से जुड़े रिकॉर्ड और मेडिकल रिपोर्ट पर विचार करने के बाद मृत्युदंड की सजा निरस्त कर दी।
कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि आरोपी का उचित मानसिक उपचार कराया जाए। उसके ठीक होने के बाद उसे रिहा किया जाए। यानी अदालत के आदेश के अनुसार रिहाई उपचार और स्वास्थ्य में सुधार की शर्त से जुड़ी है; उसे तत्काल रिहा करने का आदेश नहीं बताया गया है।
इस फैसले में आरोपी की मानसिक स्थिति और मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट अहम रही। करीब 12 साल पुराने इस तिहरे हत्याकांड में हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब राज्य सरकार को उपचार और आगे की रिहाई से संबंधित प्रक्रिया पूरी करनी होगी।