पसमांदा समाज पर भाजपा का फोकस, शादाब शम्स को मिली बड़ी जिम्मेदारी; पार्लियामेंट्री बोर्ड में मिली जगह
भारतीय जनता पार्टी ने पसमांदा समाज की छोटी जातियों तक अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए संगठनात्मक स्तर पर नई पहल की है। इसी कड़ी में उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स को राष्ट्रीय पार्लियामेंट्री बोर्ड का सदस्य बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके साथ ही उत्तराखंड से हाजी इरशाद को संगठन में प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।
जानकारी के मुताबिक, पसमांदा समाज की छोटी जातियों को संगठन से जोड़ने के उद्देश्य से देशभर में फेडरेशन आधारित संगठन का गठन किया गया है। संगठन को पसमांदा समाज तक केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी और लाभ पहुंचाने के साथ उन्हें भाजपा के संगठनात्मक ढांचे से जोड़ने की जिम्मेदारी दी गई है।
शादाब शम्स उत्तराखंड में भाजपा से जुड़े प्रमुख मुस्लिम नेताओं में शामिल हैं। वह सितंबर 2022 से उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष हैं। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उन्हें बोर्ड का अध्यक्ष बताया गया है।
संगठन में राष्ट्रीय स्तर पर कई अन्य नेताओं को भी जिम्मेदारी दी गई है। इनमें भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी, उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री दानिश आजाद अंसारी, छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ. सलीम राज, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की राष्ट्रीय संयोजिका डॉ. शालिनी अली और हरियाणा वक्फ बोर्ड के प्रशासक चौधरी जाकिर हुसैन समेत अन्य नेताओं के नाम शामिल हैं।
नए संगठन की ओर से पसमांदा समाज के सामाजिक और आर्थिक विकास तथा सरकारी योजनाओं को समाज के अंतिम छोर तक पहुंचाने पर जोर दिया गया है। संगठन से जुड़े नेताओं का कहना है कि योजनाओं का लाभ जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाना इसकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
शादाब शम्स को मिली नई जिम्मेदारी ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब भाजपा उत्तराखंड में अपने संगठनात्मक ढांचे का भी विस्तार कर रही है। अगस्त 2026 में शम्स को उत्तराखंड भाजपा के प्रदेश प्रवक्ताओं की नई टीम में भी शामिल किया गया था।
देहरादून पहुंचने के बाद हाजी इरशाद और शादाब शम्स का कार्यकर्ताओं और समर्थकों की ओर से स्वागत भी किया गया। इस दौरान गणेशपुर, डाट काली मंदिर और शिमला बाईपास चौक होते हुए स्वागत कार्यक्रम प्रदेश भाजपा कार्यालय में समाप्त हुआ।
इस नई संगठनात्मक पहल के जरिए पसमांदा समाज की छोटी जातियों तक पहुंच बनाने और सरकारी योजनाओं से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। आने वाले समय में संगठन की गतिविधियां देश के अलग-अलग राज्यों में किस तरह आगे बढ़ती हैं, इस पर नजर रहेगी।