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उत्तराखंड में BJP का '60 प्लस मिशन', 10 बड़ी चुनौतियां बनेंगी अग्निपरीक्षा; 2017 की 57 सीटों से भी आगे निकलने का लक्ष्य

 

उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अभी से अपनी चुनावी रणनीति तेज कर दी है। पार्टी इस बार '60 प्लस' मिशन के साथ मैदान में उतरने की तैयारी में है। 70 विधानसभा सीटों वाले राज्य में 60 सीटों का आंकड़ा हासिल करना BJP के लिए बड़ी राजनीतिक उपलब्धि होगी। हालांकि, इस लक्ष्य तक पहुंचने की राह आसान नहीं है। पार्टी के सामने संगठन से लेकर विपक्षी रणनीति और क्षेत्रीय मुद्दों तक कई बड़ी चुनौतियां हैं।

2017 में रिकॉर्ड प्रदर्शन, 2022 में लगा झटका

उत्तराखंड में BJP ने 2017 के विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए 57 सीटों पर जीत दर्ज की थी। पार्टी का वोट शेयर करीब 46.5 फीसदी रहा था। इसके बाद 2022 के चुनाव में BJP दोबारा सत्ता में तो लौटी, लेकिन उसकी सीटें घटकर 47 रह गईं। यानी 2017 के मुकाबले पार्टी को 10 सीटों का नुकसान हुआ।

अब 2027 में पार्टी न केवल सत्ता बरकरार रखना चाहती है, बल्कि 60 से ज्यादा सीटें जीतकर अपने पुराने प्रदर्शन को भी पीछे छोड़ने की कोशिश में है।

ये 10 चुनौतियां BJP के लिए अहम

1. 2017 वाला प्रदर्शन दोहराने की चुनौती: 57 सीटों के पुराने रिकॉर्ड से आगे निकलने के लिए पार्टी को करीब-करीब पूरे राज्य में बेहतर प्रदर्शन करना होगा।

2. 2022 में गंवाई सीटों की भरपाई: पिछले चुनाव में BJP को 10 सीटों का नुकसान हुआ था। इन क्षेत्रों में दोबारा मजबूत पकड़ बनाना बड़ी चुनौती होगी।

3. कांग्रेस की वापसी की कोशिश: 2022 में कांग्रेस 19 सीटों तक पहुंची थी। विपक्ष अब सत्ता विरोधी माहौल को अपने पक्ष में करने की कोशिश करेगा।

4. स्थानीय मुद्दे: रोजगार, पलायन, महंगाई, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मुद्दे चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

5. पहाड़ बनाम मैदान का संतुलन: उत्तराखंड की राजनीति में पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों की अलग-अलग राजनीतिक प्राथमिकताएं रही हैं। BJP के लिए दोनों क्षेत्रों में संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा।

6. टिकट वितरण: चुनाव से पहले टिकट को लेकर दावेदारों की संख्या और संभावित बगावत पार्टी के लिए चुनौती बन सकती है।

7. एंटी-इनकंबेंसी: लगातार सत्ता में रहने के कारण स्थानीय स्तर पर सरकार और विधायकों के खिलाफ नाराजगी को संभालना BJP के लिए अहम होगा।

8. संगठन की एकजुटता: 60 प्लस के लक्ष्य के लिए बूथ स्तर तक संगठन की सक्रियता और नेताओं के बीच बेहतर तालमेल जरूरी होगा।

9. क्षेत्रीय समीकरण: छोटे दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों की भूमिका भी कई सीटों पर चुनावी गणित बदल सकती है।

10. लोकसभा प्रदर्शन को विधानसभा में दोहराना: 2024 के लोकसभा चुनाव में BJP ने उत्तराखंड की सभी पांच लोकसभा सीटें जीती थीं। विधानसभा चुनाव में इसी तरह का व्यापक समर्थन बनाए रखना पार्टी के लिए महत्वपूर्ण होगा।

60 प्लस के लिए जमीन पर उतरना होगा

2027 का चुनाव BJP के लिए सिर्फ सत्ता बचाने की लड़ाई नहीं, बल्कि अपने राजनीतिक आधार को और मजबूत करने की परीक्षा भी होगा। पार्टी के सामने 60 सीटों का महत्वाकांक्षी लक्ष्य है, जबकि विपक्ष इसे रोकने की रणनीति बनाने में जुटा है। ऐसे में अगले कुछ महीनों में संगठन, उम्मीदवार चयन और स्थानीय मुद्दों पर BJP की रणनीति यह तय करने में अहम भूमिका निभाएगी कि '60 प्लस' का लक्ष्य चुनावी नारा बनकर रह जाता है या वास्तव में सीटों में तब्दील होता है।