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शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि, 'पूर्ण साक्षर' राज्य बनने के लिए 95% साक्षरता दर जरूरी

 

देश में वयस्क शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे उल्लास (Understanding of Lifelong Learning for All in Society) कार्यक्रम के तहत 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों को शिक्षित करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इस योजना का उद्देश्य गैर-साक्षर वयस्कों तक शिक्षा पहुंचाकर उन्हें पढ़ने-लिखने और बुनियादी ज्ञान से जोड़ना है।

उल्लास कार्यक्रम के तहत राज्यों में साक्षरता दर बढ़ाने के लिए विभिन्न अभियान चलाए जाते हैं। इसमें खास तौर पर उन लोगों को शामिल किया जाता है जो किसी कारणवश औपचारिक शिक्षा से वंचित रह गए थे। कार्यक्रम के माध्यम से उन्हें पढ़ने, लिखने और गणना जैसी बुनियादी क्षमताएं विकसित करने का अवसर दिया जाता है।

सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार, जब किसी राज्य में 15 वर्ष से अधिक आयु के वयस्कों की साक्षरता दर लगभग 95 प्रतिशत या उससे अधिक हो जाती है और गैर-साक्षर लोगों तक शिक्षा पहुंचाने का लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया जाता है, तब उस राज्य को 'पूर्ण साक्षर' (Fully Literate) राज्य का दर्जा दिया जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्ण साक्षरता केवल पढ़ने-लिखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों को सामाजिक, आर्थिक और डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। साक्षर नागरिक बेहतर रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकते हैं और सरकारी योजनाओं का लाभ भी अधिक प्रभावी तरीके से उठा सकते हैं।

उल्लास कार्यक्रम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों के अनुरूप तैयार किया गया है। इसके तहत स्वयंसेवकों, शिक्षकों और स्थानीय संस्थाओं की मदद से वयस्कों को शिक्षा से जोड़ा जाता है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य देश में निरक्षरता को समाप्त कर आजीवन सीखने की संस्कृति को बढ़ावा देना है।

शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि साक्षरता दर में वृद्धि से न केवल व्यक्तिगत विकास होता है, बल्कि समाज और देश की प्रगति को भी नई गति मिलती है। इसी दिशा में राज्यों को पूर्ण साक्षरता के लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।