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बदरीनाथ धाम में टूटा श्रद्धालुओं का रिकॉर्ड, पहली बार 17.79 लाख से ज्यादा पहुंची संख्या

 

उत्तराखंड के प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में इस साल श्रद्धालुओं की संख्या ने नया रिकॉर्ड बनाया है। धाम के इतिहास में पहली बार दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 17 लाख 79 हजार 805 से अधिक पहुंच गई है। खास बात यह है कि बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने में अभी डेढ़ महीने से ज्यादा का समय बाकी है। ऐसे में इस साल श्रद्धालुओं की संख्या के पुराने रिकॉर्ड के और आगे जाने की संभावना बनी हुई है।

बदरीनाथ धाम चारधाम यात्रा का प्रमुख केंद्र है और हर साल देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां भगवान बदरीविशाल के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस साल यात्रा सीजन की शुरुआत से ही धाम में श्रद्धालुओं की अच्छी भीड़ देखने को मिली। जैसे-जैसे यात्रा आगे बढ़ी, दर्शन करने वालों की संख्या लगातार बढ़ती गई।17 लाख 79 हजार 805 से अधिक श्रद्धालुओं के बदरीनाथ पहुंचने के साथ ही धाम ने अपने पिछले आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया है। यह संख्या इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यात्रा का सीजन अभी समाप्त नहीं हुआ है। कपाट बंद होने तक श्रद्धालुओं की संख्या में और इजाफा होने की उम्मीद है।

चारधाम यात्रा में बदरीनाथ के साथ केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम भी शामिल हैं। यात्रा के दौरान उत्तराखंड में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। बदरीनाथ धाम में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या धार्मिक पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।यात्रा के दौरान प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाता है। दर्शन व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन, यातायात, स्वास्थ्य सुविधाओं और सुरक्षा को लेकर विभिन्न स्तरों पर व्यवस्थाएं की जाती हैं। श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ इन व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है।

बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की तिथि धार्मिक परंपराओं और पंचांग के अनुसार तय होती है। कपाट बंद होने से पहले तक श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते रहेंगे। ऐसे में आने वाले दिनों में मौसम और यात्रा परिस्थितियों के अनुसार श्रद्धालुओं की संख्या में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।बदरीनाथ धाम में 17.79 लाख से अधिक श्रद्धालुओं का पहुंचना इस यात्रा सीजन के लिए एक बड़ा आंकड़ा है। कपाट बंद होने में अभी समय बाकी होने के कारण इस रिकॉर्ड के और आगे बढ़ने की संभावना है। इससे उत्तराखंड की चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की बढ़ती आस्था और धार्मिक पर्यटन की बढ़ती गतिविधियों का भी पता चलता है।