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नेपाल में तबाही के बीच बढ़ा एक और खतरा, 5 झीलें बनीं बेहद संवेदनशील; 538 से ज्यादा लोगों की मौत

 

नेपाल में प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचा रखी है। आपदा के कारण अब तक 538 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और मृतकों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। राहत और बचाव अभियान के बीच अब देश के सामने एक और बड़ा खतरा मंडराने लगा है। बदलते मौसम के ट्रेंड के कारण नेपाल की 5 झीलें आपदा के लिहाज से बेहद संवेदनशील होती जा रही हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, मौसम के बदलते पैटर्न और तापमान में हो रहे बदलाव का असर पहाड़ी क्षेत्रों में मौजूद झीलों और जल स्रोतों पर पड़ रहा है। ऐसी परिस्थितियों में झीलों में पानी का स्तर तेजी से बढ़ सकता है, जिससे आसपास के इलाकों में अचानक बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है। नेपाल जैसे पहाड़ी देश में यह स्थिति और ज्यादा चिंताजनक मानी जा रही है।

मौजूदा आपदा के कारण पहले ही बड़ी संख्या में लोगों की जान जा चुकी है। कई इलाकों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और राहत एवं बचाव एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में अभियान चला रही हैं। इसी बीच झीलों को लेकर सामने आई चेतावनी ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है।

नेपाल में कई झीलें हिमालयी क्षेत्र में स्थित हैं। इन झीलों पर मौसम और तापमान में बदलाव का सीधा असर पड़ता है। ग्लेशियरों के पिघलने और अत्यधिक बारिश जैसी परिस्थितियों में झीलों का जलस्तर बढ़ सकता है। यदि पानी का दबाव प्राकृतिक सीमा से बाहर चला जाए तो झील के टूटने से अचानक बड़े पैमाने पर पानी नीचे की ओर आने का खतरा रहता है।

ऐसी स्थिति में निचले इलाकों में रहने वाली आबादी को सबसे ज्यादा खतरा हो सकता है। अचानक आने वाली बाढ़ से सड़क, पुल, घर और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंच सकता है। यही वजह है कि संवेदनशील झीलों की लगातार निगरानी को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

फिलहाल नेपाल में जारी आपदा से निपटने के लिए राहत कार्य जारी हैं। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और जरूरी सहायता उपलब्ध कराने में जुटा है। वहीं, संभावित झील आपदा को लेकर भी निगरानी बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

538 से ज्यादा मौतों के बाद अब 5 संवेदनशील झीलों का खतरा नेपाल के लिए नई चुनौती बन गया है। बदलते मौसम के बीच इन झीलों की स्थिति पर विशेषज्ञों और प्रशासन की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति इस खतरे को और बढ़ाती है या राहत देती है, यह बेहद महत्वपूर्ण होगा।