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36 साल बाद भी घर वापसी का इंतजार, कश्मीरी पंडितों ने शुरू किया ‘आवाहन भैरव’ यज्ञ

 

पिछले 36 वर्षों से कश्मीर से विस्थापित कश्मीरी पंडित अपने मूल घरों में वापसी के लिए इंतजार कर रहे हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में जीवन यापन कर रहे इस समुदाय ने वर्षों से राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर कई प्रयास किए, लेकिन अब उन्होंने आध्यात्मिक मार्ग को भी अपने प्रयासों में शामिल किया है।

कश्मीरी पंडित अब अपने घर वापसी की उम्मीद के लिए यज्ञ और तंत्र-मंत्र का सहारा ले रहे हैं। इसी कड़ी में उन्होंने महा अभियान ‘आवाहन भैरव’ की शुरुआत की है। यह यज्ञ विशेष रूप से उन आध्यात्मिक एवं धार्मिक शक्तियों को आमंत्रित करने के लिए आयोजित किया गया है जो उनके घर वापसी के मार्ग को सुगम बना सकते हैं।

इस महा अभियान में देश के अलग-अलग राज्यों से कई साधु-संत और योग गुरुओं ने भाग लिया है। उन्होंने यज्ञ के दौरान मंत्रोच्चारण और धार्मिक अनुष्ठान के माध्यम से शांति, सुरक्षा और घर वापसी की कामना की। आयोजन के आयोजक ने कहा कि यह यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह समुदाय के मानसिक और सांस्कृतिक उत्साह को बढ़ाने का भी प्रयास है।

विस्थापित कश्मीरी पंडितों का कहना है कि यह यज्ञ उन्हें संघठन और उम्मीद की भावना देता है। वर्षों से अलगाव और विस्थापन के कारण इस समुदाय ने न केवल अपने घरों को खोया है, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को भी चुनौती का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक प्रयासों के साथ-साथ आध्यात्मिक उपाय उन्हें अपने उद्देश्य की दिशा में शक्ति प्रदान कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ‘आवाहन भैरव’ यज्ञ जैसी पहल सांस्कृतिक और धार्मिक पुनर्जागरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल समुदाय को एकजुट करती है, बल्कि उनके सांस्कृतिक और धार्मिक अधिकारों की याद दिलाने का माध्यम भी बनती है।

साधु-संतों ने कहा कि यज्ञ का उद्देश्य न केवल आध्यात्मिक बल प्राप्त करना है, बल्कि यह कश्मीरी पंडितों को संकट के समय में मानसिक स्थिरता और धैर्य प्रदान करने का भी साधन है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि इस अभियान से समुदाय में सकारात्मक ऊर्जा और सहयोग की भावना मजबूत होगी।

इस अवसर पर यज्ञ स्थल पर जुटे समुदाय के लोग भावुक दिखाई दिए। कई लोग अपने पूर्वजों की स्मृतियों और अपने घरों की याद को साझा करते हुए उम्मीद और आस्था के मिश्रित भाव रख रहे थे। आयोजन समिति ने बताया कि यह यज्ञ अगले कुछ हफ्तों तक लगातार चलता रहेगा और इसमें लगातार नए साधु-संत और श्रद्धालु जुड़ते रहेंगे।

कश्मीरी पंडितों के इस महा अभियान ने यह संदेश दिया है कि 36 साल के लंबित इंतजार और कठिनाइयों के बावजूद, समुदाय अपने घर वापसी के प्रयासों में आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिकता को साधन बना रहा है। यह पहल न केवल उनके लिए बल्कि पूरे देश के लिए सांस्कृतिक और धार्मिक सहिष्णुता का प्रतीक बन सकती है।