×

पिथौरागढ़ में आदि कैलाश यात्रा का शुभारंभ, शिव-पार्वती मंदिर के कपाट खुले; 200 श्रद्धालुओं का पहला जत्था रवाना

 

उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में स्थित शिव-पार्वती मंदिर के कपाट आज विधि-विधान के साथ खोल दिए गए। इसके साथ ही पवित्र आदि कैलाश यात्रा का औपचारिक शुभारंभ हो गया है। लंबे इंतजार के बाद कपाट खुलने के साथ ही व्यास घाटी एक बार फिर श्रद्धालुओं की आस्था और गतिविधियों से गूंज उठी है।धारचूला से प्रशासन की कड़ी निगरानी में यात्रा की शुरुआत कराई गई। उपजिलाधिकारी (SDM) Ashish Joshi ने हरी झंडी दिखाकर करीब 200 श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को रवाना किया। सुरक्षा और व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने यात्रा मार्ग पर विशेष इंतजाम किए हैं।

<a style="border: 0px; overflow: hidden" href=https://youtube.com/embed/-GPzEjPiXaY?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/-GPzEjPiXaY/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640">

यह जत्था लगभग 140 किलोमीटर का कठिन और दुर्गम पहाड़ी सफर तय कर आदि कैलाश पहुंचेगा। यात्रा मार्ग में श्रद्धालु प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ उच्च हिमालयी क्षेत्र की चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों का भी अनुभव करेंगे।आदि कैलाश को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र स्थान माना जाता है और इसे भगवान शिव के आध्यात्मिक निवासों में से एक माना जाता है। यात्रा के दौरान श्रद्धालु पार्वती सरोवर और आदि कैलाश के दिव्य दर्शन करेंगे, जो आस्था और आध्यात्मिकता का प्रमुख केंद्र हैं।

स्थानीय प्रशासन ने यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए चिकित्सा, सुरक्षा और आवास की विशेष व्यवस्था की है। साथ ही मौसम और भूस्खलन जैसी संभावित चुनौतियों को देखते हुए लगातार निगरानी भी रखी जा रही है।लंबे समय से इंतजार कर रहे श्रद्धालुओं के लिए यह यात्रा विशेष महत्व रखती है, क्योंकि यह न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ी है बल्कि हिमालय की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत को भी करीब से देखने का अवसर प्रदान करती है। फिलहाल पहले जत्थे के रवाना होने के साथ ही आदि कैलाश यात्रा आधिकारिक रूप से शुरू हो गई है और आने वाले दिनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।