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आचार्य बालकृष्ण 15 साल पुराने केस में बरी, राष्ट्रपति को मिली शिकायत से शुरू हुई थी जांच; 2011 में CBI ने संभाला था मामला

 

योग गुरु बाबा रामदेव के सहयोगी और पतंजलि योगपीठ के प्रमुख चेहरों में शामिल आचार्य बालकृष्ण को 15 साल पुराने मामले में बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उन्हें इस केस में बरी कर दिया है। यह मामला एक शिकायत के आधार पर शुरू हुआ था, जो तत्कालीन समय में राष्ट्रपति को भेजी गई थी। इसके बाद जांच का सिलसिला शुरू हुआ और वर्ष 2011 में सीबीआई ने मामले की जांच अपने हाथ में ली थी।

राष्ट्रपति को मिली शिकायत के बाद शुरू हुआ था मामला

जानकारी के अनुसार, आचार्य बालकृष्ण से जुड़ा यह मामला उस समय सामने आया था, जब उनके खिलाफ राष्ट्रपति को शिकायत भेजी गई थी। शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू हुई और आगे चलकर इसे केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपा गया।सीबीआई ने वर्ष 2011 में इस मामले में जांच शुरू की थी। लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अब अदालत ने आचार्य बालकृष्ण को राहत देते हुए बरी कर दिया है।

बाबा रामदेव के करीबी सहयोगी हैं बालकृष्ण

आचार्य बालकृष्ण पतंजलि योगपीठ के प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। वह लंबे समय से बाबा रामदेव के साथ मिलकर पतंजलि समूह के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।पतंजलि आयुर्वेद के प्रबंधन, उत्पाद विकास और संस्थान के संचालन में उनकी अहम जिम्मेदारी रही है। आयुर्वेद और स्वदेशी उत्पादों के क्षेत्र में पतंजलि को बड़ा ब्रांड बनाने में उनका योगदान माना जाता है।

15 साल तक चली कानूनी प्रक्रिया

इस मामले में जांच शुरू होने के बाद कानूनी प्रक्रिया करीब डेढ़ दशक तक चली। इस दौरान जांच एजेंसियों की कार्रवाई और अदालत में सुनवाई जारी रही।अब अदालत के फैसले के बाद आचार्य बालकृष्ण को बड़ी राहत मिली है। उनके समर्थकों ने इसे न्याय की जीत बताया है।

बाबा रामदेव ने जताई खुशी

आचार्य बालकृष्ण के बरी होने के बाद बाबा रामदेव ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लंबे समय बाद सत्य सामने आया है। इससे पहले बाबा रामदेव ने आरोप लगाया था कि बालकृष्ण को नुकसान पहुंचाने और पतंजलि को कमजोर करने की कोशिश की गई थी।हालांकि, इस मामले से जुड़े सभी पहलुओं पर अंतिम स्थिति अदालत के फैसले के बाद ही स्पष्ट हुई है।

पतंजलि के लिए अहम समय

आचार्य बालकृष्ण के बरी होने को पतंजलि समूह के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वह कंपनी के प्रमुख रणनीतिक फैसलों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।15 साल पुराने इस मामले में राहत मिलने के बाद आचार्य बालकृष्ण और पतंजलि योगपीठ को बड़ी कानूनी राहत मिली है। राष्ट्रपति को मिली शिकायत से शुरू हुआ यह मामला 2011 में सीबीआई जांच तक पहुंचा था, जो अब अदालत के फैसले के साथ समाप्त हो गया है।