सोमवती अमावस्या पर हरिद्वार में उमड़ा आस्था का सैलाब, वीडियो में देंखे 76.50 लाख श्रद्धालुओं ने किया गंगा स्नान
अधिकमास में पड़ रही सोमवती अमावस्या के अवसर पर धर्मनगरी हरिद्वार में श्रद्धालुओं का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा। हरकी पैड़ी सहित गंगा के विभिन्न घाटों पर सोमवार को देर शाम तक करीब 76 लाख 50 हजार श्रद्धालुओं ने मां गंगा में पवित्र स्नान किया। दिनभर श्रद्धालुओं का आगमन जारी रहा और शाम की गंगा आरती तक घाट श्रद्धालुओं से खचाखच भरे रहे। उत्तराखंड समेत देश के 12 राज्यों से बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया। श्रद्धालुओं ने पितृ तर्पण, पूजा-अर्चना और दान-पुण्य जैसे धार्मिक अनुष्ठान भी किए। मान्यता है कि सोमवती अमावस्या पर गंगा स्नान और पितरों का तर्पण करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है तथा जीवन में सुख-समृद्धि और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
हरकी पैड़ी और आसपास के घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। श्रद्धालु “हर-हर गंगे” और “हर-हर महादेव” के जयकारों के साथ गंगा में आस्था की डुबकी लगाते नजर आए। शाम को होने वाली भव्य गंगा आरती ने पूरे माहौल को और अधिक आध्यात्मिक बना दिया। हजारों श्रद्धालुओं ने आरती में शामिल होकर मां गंगा का आशीर्वाद प्राप्त किया।इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से प्रशासन और पुलिस के सामने भीड़ प्रबंधन की बड़ी चुनौती थी। हालांकि प्रशासन ने पहले से व्यापक तैयारियां की थीं। शहर और घाट क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था, जबकि सीसीटीवी कैमरों और कंट्रोल रूम के माध्यम से लगातार निगरानी रखी गई।
यह आयोजन केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक नजरिए से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दरअसल, वर्ष 2027 में होने वाले महाकुंभ की तैयारियों को देखते हुए इस अवसर को एक तरह से व्यवस्थाओं की परीक्षा के रूप में देखा गया। लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बीच भीड़ नियंत्रण, ट्रैफिक प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं की कार्यक्षमता को वास्तविक परिस्थितियों में परखा गया।प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, सोमवती अमावस्या पर उमड़ी भीड़ ने कुंभ-2027 की तैयारियों को लेकर महत्वपूर्ण अनुभव प्रदान किया है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि भविष्य में और अधिक बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाओं को किस प्रकार मजबूत किया जाए।
श्रद्धालुओं के सुरक्षित और सुचारु आवागमन के लिए विशेष यातायात योजना लागू की गई थी। विभिन्न मार्गों पर वाहनों का संचालन नियंत्रित किया गया और पार्किंग की अतिरिक्त व्यवस्था भी की गई। स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी विभिन्न स्थानों पर तैनात रहीं, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।सोमवती अमावस्या के इस पावन अवसर पर हरिद्वार एक बार फिर आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बन गया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बावजूद व्यवस्थाएं सुचारु रूप से संचालित होती रहीं, जिसे प्रशासन ने अपनी बड़ी सफलता माना है।