युवराज मेहता मौत मामले में कोर्ट ने नोएडा अथॉरिटी को घेरा, जिम्मेदारी पर सवाल
सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के मामले में गौतमबुद्धनगर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने अब न्याय की प्रक्रिया को गति देने के संकेत दिए हैं। कोर्ट ने इस मामले में पुलिस और प्रशासन को कड़ी फटकार लगाते हुए सवाल उठाया, जिसने नोएडा अथॉरिटी की नींद उड़ा दी।
कोर्ट ने पूछा, “जब सड़क पर गड्ढे की जिम्मेदारी नोएडा अथॉरिटी की थी, तो उन्हें आरोपी क्यों नहीं बनाया गया?” इस सवाल ने मामले की पूरी जांच प्रक्रिया और जिम्मेदारियों के बंटवारे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कोर्ट का यह रुख साफ तौर पर यह संकेत देता है कि जांच में लापरवाही या प्राथमिक जिम्मेदारों को नजरअंदाज करना स्वीकार्य नहीं है।
युवराज मेहता की मौत सड़क पर गड्ढे में गिरने के कारण हुई थी। यह घटना नोएडा अथॉरिटी द्वारा बनाए गए सड़क नेटवर्क और उसकी देखरेख में हुई लापरवाही की ओर इशारा करती है। मामले की जांच शुरू होने के बाद परिवार ने लगातार यह सवाल उठाया कि सिर्फ गड्ढे में गिरने के लिए स्थानीय कर्मचारियों या ठेकेदारों को दोषी ठहराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारों पर भी सवाल उठने चाहिए।
कोर्ट की फटकार से स्पष्ट है कि न्यायपालिका सड़क सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही के मामलों में गंभीर है। न्यायालय ने कहा कि अगर जिम्मेदारियों का सही बंटवारा नहीं किया गया और संबंधित अधिकारियों को आरोपी नहीं बनाया गया, तो यह न केवल पीड़ित परिवार के लिए न्याय के सवाल खड़े करता है, बल्कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने की संभावना भी कम हो जाती है।
पुलिस और प्रशासन को कोर्ट की इस फटकार से यह साफ संदेश मिला है कि जांच में किसी भी स्तर पर पक्षपात या लापरवाही सहन नहीं की जाएगी। कोर्ट ने आगे कहा कि दोषियों की पहचान और कार्रवाई में देरी स्वीकार्य नहीं है, और सभी जिम्मेदार अधिकारियों पर जांच के लिए स्पष्ट निर्देश दिए जाएंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला सड़क सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है। युवराज मेहता की मौत ने न केवल परिवार को व्यक्तिगत नुकसान पहुंचाया, बल्कि पूरे नोएडा और आसपास के क्षेत्रों में सड़क और निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए।
कोर्ट के रुख के बाद संभावना जताई जा रही है कि नोएडा अथॉरिटी के उच्च अधिकारियों को भी आरोपी बनाया जा सकता है। इससे यह स्पष्ट होगा कि प्रशासनिक स्तर पर किसी भी लापरवाही को अदालत नज़रअंदाज नहीं करेगी।
कुल मिलाकर, युवराज मेहता की मौत मामले में गौतमबुद्धनगर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने पुलिस, प्रशासन और नोएडा अथॉरिटी को चेतावनी दी है कि जिम्मेदारी की पूरी जांच और उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। अदालत का यह कड़ा रुख पीड़ित परिवार के लिए न्याय की उम्मीद को मजबूत कर रहा है और प्रशासनिक जवाबदेही के महत्व को उजागर कर रहा है।