गोरखपुर में सिया मैटरनिटी सेंटर में ऑपरेशन के बाद प्रसूता की मौत, चिकित्सक और अस्पताल पर मामला दर्ज
गोरखपुर के बड़हलगंज स्थित सिया मैटरनिटी सेंटर में ऑपरेशन के बाद एक प्रसूता की मौत हो गई। सूचना के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान या उसके तुरंत बाद महिला के अत्यधिक रक्तस्राव होने से उसकी जान चली गई। मृतक के पति की शिकायत के आधार पर पुलिस ने चिकित्सक डॉ. पूनम यादव के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रारंभिक जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जांच में यह भी पाया गया कि अस्पताल का रजिस्ट्रेशन नहीं था, जिससे स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल ओपीडी सील कर दी है। अधिकारी यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि अस्पताल की सभी कानूनी और चिकित्सा मानकों का पालन किया जा रहा है या नहीं।
स्थानीय लोगों और मरीजों ने घटना की गंभीरता पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं न केवल मरीजों और उनके परिवारों के लिए दर्दनाक होती हैं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य क्षेत्र की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाती हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने बताया कि रजिस्ट्रेशन न होने के कारण अस्पताल पर कड़ी कार्रवाई की गई है। विभाग ने कहा कि मरीजों की सुरक्षा और चिकित्सा मानकों का पालन सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। अधिकारियों ने कहा कि यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया तो अस्पताल पर और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
पीड़ित परिवार का कहना है कि ऑपरेशन के दौरान और उसके बाद महिला को सही समय पर पर्याप्त देखभाल और सहायता नहीं मिली। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस इस मामले में अस्पताल के रिकॉर्ड, ऑपरेशन रिपोर्ट और स्टाफ से पूछताछ कर रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रसूति मृत्यु के मामलों में चिकित्सकीय लापरवाही और अस्पताल की अनियमितताएं गंभीर समस्या बन सकती हैं। उन्होंने कहा कि अस्पतालों को अनिवार्य रूप से रजिस्टर्ड और मान्यता प्राप्त होना चाहिए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में सही और समय पर इलाज सुनिश्चित किया जा सके।
इस घटना ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सुरक्षा और निगरानी के महत्व को उजागर किया है। अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि किसी भी स्वास्थ्य केंद्र में इलाज करवाने से पहले उसके रजिस्ट्रेशन और प्रमाणिकता की जांच अवश्य करें।
कुल मिलाकर, गोरखपुर के बड़हलगंज सिया मैटरनिटी सेंटर में प्रसूता की मौत ने अस्पताल प्रबंधन, स्वास्थ्य विभाग और कानून व्यवस्था की समीक्षा को मजबूर कर दिया है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की त्वरित कार्रवाई से यह संदेश गया है कि मरीजों की सुरक्षा और अस्पतालों की जवाबदेही सुनिश्चित करने में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।