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महिला के साथ वकील का अश्लील AI वीडियो बनाकर ब्लैकमेल, सोशल मीडिया पर वायरल करने का आरोप; इंफ्लुएंसर गिरफ्तार

 

एक गंभीर साइबर अपराध का मामला सामने आया है, जिसमें एक सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का दुरुपयोग कर एक महिला और एक वकील का फर्जी अश्लील वीडियो बनाने, उसे ब्लैकमेल करने और बाद में सोशल मीडिया पर वायरल करने के आरोप लगे हैं। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी इंफ्लुएंसर को गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस के अनुसार, यह पूरा मामला डिजिटल तकनीक के दुरुपयोग से जुड़ा हुआ है, जहां आरोपी ने AI टूल्स की मदद से फर्जी वीडियो तैयार किया। आरोप है कि इस वीडियो में महिला और वकील की छवि को गलत तरीके से एडिट कर अश्लील रूप में प्रस्तुत किया गया, जबकि असल में ऐसा कोई वीडियो अस्तित्व में नहीं था।

शिकायत के मुताबिक, आरोपी ने पहले इस फर्जी वीडियो के जरिए दोनों को ब्लैकमेल करना शुरू किया और पैसे की मांग की। जब पीड़ितों ने दबाव में आने से इनकार किया, तो आरोपी ने वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जिससे उनकी छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा।

मामले की शिकायत मिलते ही साइबर क्राइम पुलिस ने जांच शुरू की और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान की। जांच में यह भी सामने आया कि वीडियो को एडिट करने के लिए कई एडवांस AI और डीपफेक टूल्स का इस्तेमाल किया गया था, जिससे वास्तविक और नकली सामग्री के बीच अंतर करना मुश्किल हो गया।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी एक सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर है और उसके हजारों फॉलोअर्स हैं। वह डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग अपनी पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ अवैध गतिविधियों के लिए भी कर रहा था, जिसकी जांच अब गहराई से की जा रही है।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, “यह मामला साइबर अपराध की गंभीर श्रेणी में आता है, जहां AI तकनीक का दुरुपयोग कर किसी की छवि खराब करने और ब्लैकमेल करने की कोशिश की गई है। हम इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रहे हैं कि क्या इसमें और लोग भी शामिल हैं।”

पीड़ित पक्ष ने बताया कि इस घटना से उन्हें मानसिक और सामाजिक रूप से काफी नुकसान हुआ है। फर्जी वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसे मामलों को रोका जा सके।

पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उसके इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि कहीं उसने इससे पहले भी इस तरह की हरकतें तो नहीं की हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि AI तकनीक का गलत इस्तेमाल कितना खतरनाक हो सकता है। डीपफेक और एडिटेड वीडियो के जरिए किसी की छवि को नुकसान पहुंचाना अब एक बड़ा साइबर खतरा बन चुका है।

फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और आरोपी से पूछताछ जारी है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर किसी भी संदिग्ध कंटेंट को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर करें।