पश्चिम बंगाल में शपथ ग्रहण समारोह को लेकर वायरल दावा, वीडियो में जाने सीएम योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी की बात अपुष्ट
सोशल मीडिया पर शनिवार को एक कथित शपथ ग्रहण समारोह का वीडियो और दावा तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कहा जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में Suvendu Adhikari ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और इस दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath भी मौजूद रहे। हालांकि, अब तक इस दावे की किसी भी आधिकारिक स्रोत द्वारा पुष्टि नहीं की गई है। वायरल पोस्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि शपथ ग्रहण समारोह के दौरान Suvendu Adhikari ने शपथ लेने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ का अभिवादन करते हुए उन्हें प्रणाम किया। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि मंच पर योगी आदित्यनाथ ने उन्हें भगवा गमछा ओढ़ाया और कार्यक्रम में राजनीतिक एकता के संकेत देखने को मिले।
इन दावों में आगे यह भी उल्लेख किया गया है कि मंच पर कई अन्य नेताओं की उपस्थिति थी, जिनमें बिहार के मुख्यमंत्री और दिल्ली की मुख्यमंत्री के नाम का भी जिक्र किया जा रहा है। हालांकि इन सभी नामों और कथित उपस्थिति को लेकर कोई आधिकारिक वीडियो, प्रेस विज्ञप्ति या सरकारी पुष्टि उपलब्ध नहीं है।विशेष रूप से यह दावा किया गया कि कार्यक्रम में भारी राजनीतिक उत्साह देखने को मिला और कार्यकर्ताओं ने “जय श्रीराम”के नारे लगाए, जबकि मंच पर मौजूद नेताओं ने लोगों का अभिवादन स्वीकार किया। लेकिन इन घटनाओं की स्वतंत्र पुष्टि किसी भी विश्वसनीय समाचार एजेंसी या सरकारी रिकॉर्ड में नहीं मिलती।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे वीडियो और पोस्ट अक्सर एडिटेड या संदर्भ से काटे हुए होते हैं, जिन्हें सोशल मीडिया पर गलत तरीके से प्रस्तुत किया जाता है। चुनावी या राजनीतिक माहौल में इस तरह की भ्रामक सामग्री तेजी से फैलती है, जिससे जनता में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में किसी भी नए मुख्यमंत्री शपथ ग्रहण का कोई आधिकारिक कार्यक्रम हाल ही में नहीं हुआ है और राज्य में सरकार गठन से जुड़ी कोई नई संवैधानिक प्रक्रिया भी घोषित नहीं की गई है।
विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी वायरल वीडियो या दावे को बिना सत्यापन के साझा न करें। ऐसे मामलों में केवल आधिकारिक सरकारी बयान, प्रेस सूचना ब्यूरो या विश्वसनीय समाचार स्रोतों पर ही भरोसा करना चाहिए।फिलहाल यह पूरा मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है, लेकिन तथ्यात्मक रूप से इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। जांच एजेंसियां और तथ्य-जांच संगठन भी इस वायरल दावे की सत्यता की जांच में जुटे हुए हैं।स्थिति स्पष्ट होने तक इसे एक अपुष्ट और संदिग्ध दावा माना जा रहा है।