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यूपी में विजयादशमी की धूम: कानपुर में खुला दशानन मंदिर, आगरा में RSS ने निकाला पथ संचलन

 

उत्तर प्रदेश में विजयादशमी का पर्व धार्मिक आस्था और पारंपरिक आयोजनों के साथ मनाया जा रहा है। कानपुर में दशहरे के मौके पर दशानन यानी रावण के मंदिर के कपाट खोले गए। वहीं, आगरा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की ओर से पथ संचलन निकाला गया। प्रदेश के अलग-अलग शहरों में मंदिरों में पूजा-अर्चना, शस्त्र पूजन और सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए दशहरे का उत्साह देखने को मिल रहा है।

विजयादशमी को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। देश के अधिकांश हिस्सों में इस दिन रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है। हालांकि, उत्तर प्रदेश के कुछ स्थानों पर स्थानीय मान्यताओं और परंपराओं के कारण दशहरा अलग अंदाज में मनाया जाता है।

कानपुर में दशहरे पर खुले दशानन मंदिर के कपाट

कानपुर में विजयादशमी के अवसर पर रावण के मंदिर के कपाट खोले गए। इस मंदिर को लेकर स्थानीय स्तर पर विशेष मान्यता है। दशहरे के दिन मंदिर खुलने पर श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

आमतौर पर विजयादशमी पर रावण दहन किया जाता है, लेकिन कुछ स्थानों पर रावण की विद्वता और शिवभक्ति को याद करते हुए उसकी पूजा करने की परंपरा भी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रावण शास्त्रों का ज्ञाता और भगवान शिव का उपासक था। इसी वजह से कुछ समुदाय और स्थानीय परंपराएं उसे अलग दृष्टिकोण से देखती हैं।

आगरा में RSS का पथ संचलन

आगरा में विजयादशमी के मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से पथ संचलन निकाला गया। पथ संचलन संघ की प्रमुख गतिविधियों में शामिल है, जिसमें स्वयंसेवक निर्धारित मार्ग पर अनुशासित तरीके से एक साथ चलते हैं।

RSS में विजयादशमी का विशेष महत्व है। इस अवसर पर विभिन्न स्थानों पर संगठनात्मक कार्यक्रम, शस्त्र पूजन और पथ संचलन आयोजित किए जाते हैं। आगरा में हुए कार्यक्रम को लेकर स्थानीय स्तर पर लोगों की नजर रही। हालांकि, संचलन में शामिल स्वयंसेवकों की संख्या, मार्ग और कार्यक्रम की अन्य विस्तृत जानकारी आयोजकों या प्रशासन की आधिकारिक सूचना से स्पष्ट होगी।

यूपी में अलग-अलग अंदाज में मनाया जा रहा दशहरा

प्रदेश के विभिन्न शहरों में विजयादशमी पर धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कहीं रावण दहन की तैयारियां हैं, तो कहीं मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और संगठनात्मक कार्यक्रम हो रहे हैं।

दशहरे का पर्व भगवान राम की रावण पर विजय की स्मृति से जुड़ा है। यह त्योहार सत्य, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने का संदेश देता है। वहीं, अलग-अलग क्षेत्रों की स्थानीय परंपराएं विजयादशमी को विशिष्ट पहचान देती हैं।