खेजड़ी बचाओ आंदोलन को वसुंधरा राजे का समर्थन, बोलीं–“सबके साथ हूं”
राजस्थान में खेजड़ी और अन्य हरे पेड़ों की सुरक्षा को लेकर चल रहे “खेजड़ी बचाओ” आंदोलन को राजनीतिक समर्थन मिलना शुरू हो गया है। प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा नेता वसुंधरा राजे ने इस आंदोलन को खुले दिल से समर्थन दिया और कहा कि वे इस पहल के साथ खड़ी हैं। राजे ने ट्वीट और मीडिया बातचीत दोनों में यह स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और वन संपदा की सुरक्षा को बढ़ावा देना है।
वसुंधरा राजे ने कहा, “खेजड़ी और अन्य हरे पेड़ हमारे पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। इस आंदोलन के साथ मैं पूरी तरह खड़ी हूं। यह सिर्फ किसी राजनीतिक दल का मामला नहीं है, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन और पर्यावरण की सुरक्षा का सवाल है।” उन्होंने आगे कहा कि सरकार, प्रशासन और समाज के हर वर्ग को इस आंदोलन में सहयोग करना चाहिए।
राजस्थान के कई जिलों में पिछले कुछ महीनों में खेजड़ी और अन्य पेड़ों की अवैध कटाई की घटनाएं सामने आई हैं। बयाना क्षेत्र में 159 हरे पेड़ों की कटाई के मामले ने आंदोलन को और गति दी है। आंदोलनकारियों ने सरकार और प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग की थी। वसुंधरा राजे के समर्थन से आंदोलन को राजनीतिक और सामाजिक मजबूती मिलने की संभावना बढ़ गई है।
राजे ने जोर देते हुए कहा कि पर्यावरण सुरक्षा और वृक्ष संरक्षण सिर्फ सरकारी पहल नहीं होनी चाहिए, बल्कि नागरिकों और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि पेड़ कटने की घटनाओं में संलिप्त अधिकारियों और दलालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि वसुंधरा राजे जैसे वरिष्ठ नेताओं का समर्थन आंदोलन को व्यापक पहुंच और वैधता देता है। इसके साथ ही, यह राज्य में पर्यावरण और वन संपदा के महत्व पर जनता में जागरूकता फैलाने में मदद करता है। आंदोलनकारियों ने भी राजे के समर्थन की सराहना की और कहा कि यह उनके हौसले को और बढ़ाएगा।
आंदोलन की अगली योजना के तहत आंदोलनकारी राज्य भर में खेजड़ी और अन्य पेड़ों की सुरक्षा के लिए जन जागरूकता अभियान चलाने और स्थानीय समुदायों को इस दिशा में जोड़ने की तैयारी कर रहे हैं। वसुंधरा राजे ने भी इस पहल का समर्थन किया और कहा कि वे हर संभव तरीके से आंदोलन की मदद करेंगी।
राजस्थान में वन संपदा और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे हमेशा से महत्वपूर्ण रहे हैं। खेजड़ी के पेड़ न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में छाया और लकड़ी का स्रोत हैं, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, जल संरक्षण और जैव विविधता के संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाते हैं। इस आंदोलन को राजे का समर्थन मिलने से यह संदेश गया है कि पर्यावरण के संरक्षण में राजनीतिक विचारधारा से ऊपर उठकर कदम उठाने की जरूरत है।
कुल मिलाकर, “खेजड़ी बचाओ” आंदोलन को वसुंधरा राजे का समर्थन मिलने से न केवल आंदोलनकारियों को राजनीतिक मजबूती मिली है, बल्कि यह राज्य में पर्यावरण जागरूकता फैलाने और वन संपदा की सुरक्षा के लिए व्यापक संदेश भी गया है। राजे की यह प्रतिक्रिया यह दिखाती है कि पर्यावरण और वृक्ष संरक्षण को लेकर नेतृत्व और जनता का सहयोग दोनों जरूरी हैं।