उत्तर प्रदेश सरकार ग्रीन हाइड्रोजन नीति के तहत स्टार्टअप्स और नवाचार को बढ़ावा देगी
उत्तर प्रदेश सरकार ग्रीन हाइड्रोजन नीति के तहत प्रदेश में शोध, नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। इस पहल के अंतर्गत प्रदेश में ग्रीन हाइड्रोजन के दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे। इन सेंटरों का उद्देश्य नई तकनीकों और नवाचारों को विकसित करना और ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में व्यावहारिक समाधान तैयार करना है।
सरकार का लक्ष्य है कि इस नीति के माध्यम से ग्रीन हाइड्रोजन की उत्पादन लागत को कम किया जाए और उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख ग्रीन एनर्जी टेक्नोलॉजी हब बनाया जा सके। इस पहल से प्रदेश में न केवल ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रोजगार और स्टार्टअप्स के लिए भी सकारात्मक अवसर पैदा होंगे।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़े शोध, तकनीकी विकास और प्रायोगिक परियोजनाओं पर काम किया जाएगा। इसके साथ ही राज्य सरकार इन सेंटरों से जुड़े स्टार्टअप्स को पांच वर्षों तक वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। यह सहायता स्टार्टअप्स को तकनीकी विकास, उत्पादन और विपणन के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करेगी।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रीन हाइड्रोजन वह ऊर्जा स्रोत है जो पर्यावरण के अनुकूल है और पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करता है। उत्तर प्रदेश सरकार की यह नीति न केवल राज्य में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाएगी, बल्कि देश में ग्रीन हाइड्रोजन उद्योग के लिए मजबूत इकोसिस्टम भी तैयार करेगी।
सरकार ने बताया कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में अध्ययन और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि छात्र, शोधकर्ता और उद्योग जगत के लोग नई तकनीकों और नवाचारों से जुड़े ज्ञान और कौशल प्राप्त कर सकें। इससे प्रदेश में ग्रीन हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी को अपनाने और उद्योग को बढ़ाने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि इस पहल से प्रदेश में ग्रीन हाइड्रोजन आधारित उद्योग, परिवहन और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। नीति का उद्देश्य है कि अगले पांच वर्षों में उत्तर प्रदेश ग्रीन एनर्जी उत्पादन और नवाचार का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय केंद्र बन जाए।
सरकार की यह रणनीति राज्य के ऊर्जा, उद्योग और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की संयुक्त पहल का परिणाम है। इस नीति के जरिए ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में स्टार्टअप्स और शोधकर्ताओं को समर्थन देने के लिए एक स्थायी ढांचा तैयार किया जा रहा है।
इस पहल के तहत प्रदेश के शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों में ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट्स को लागू किया जाएगा। यह कदम न केवल आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा, बल्कि पर्यावरण के प्रति उत्तर प्रदेश की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
इस तरह, उत्तर प्रदेश सरकार की ग्रीन हाइड्रोजन नीति राज्य के ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार, शोध और स्टार्टअप्स को एक नई दिशा देगी। यह नीति प्रदेश को देश और दुनिया में ग्रीन एनर्जी टेक्नोलॉजी के अग्रणी केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम कदम साबित होगी।